दिल्ली में पीने के पानी की सप्लाई में गिरावट
अभी गर्मी की शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन दिल्ली में पीने के पानी की सप्लाई में गिरावट होनी शुरु हो गई है। दिल्ली जल बोर्ड ने खुद स्वीकार किया है कि उसके विभिन्न जल उत्पादन केंद्रों में 30 फीसदी तक जल का उत्पादन कम हो गया है। इसकी वजह से दिल्ली के अनेक इलाकों में पानी की सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है और कई इलाके अब जल के टैंकरों के भरोसे रह गए हैं।
हालांकि जल बोर्ड ने इसकी वजह यमुना में अमोनिया और अन्य प्रदूषणकारी तत्त्वों को बताया है। दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक 25 जनवरी को यमुना में अमोनिया का प्रदूषण 02.2 पीपीएम के स्तर तक बढ़ गया है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हाईकोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड ने एक याचिका दायर कर अपील की है कि वह हरियाणा सरकार को उसके हिस्से में बह रही यमुना में अमोनिया और अन्य प्रदूषणकारी तत्त्वों को घुलने से रोकने संबंधी निर्देश दे। दिल्ली हाईकोर्ट ने जल बोर्ड की अपील पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को उसका पक्ष रखने के लिए नोटिस भी जारी किया है।
हरियाणा को अपना जवाब 4 फरवरी तक देना है। मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर हरियाणा का जवाब संतोषजनक रहता है तो ठीक है, अन्यथा इस मामले पर वह एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन करेगी जो इस पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
अपनी गलती छिपा रहे केजरीवाल- भाजपा
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार अपनी गलती छिपाने के लिए यमुना में प्रदूषण का आरोप दूसरे राज्य के मत्थे पर मढ़ रही है। सच्चाई यह है कि हरियाणा की बजाय दिल्ली में ही यमुना में सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है।
दिल्ली के नाले यमुना में गिर रहे हैं। इस वजह से यमुना एक काले नाले में तब्दील हो गई है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि हरियाणा को भी अपने हिस्से की यमुना को साफ करने की कोशिश करनी चाहिये, लेकिन केजरीवाल सरकार दूसरे पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
उसे दिल्ली की प्रदूषणकारी इकाइयों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या उन्हें अपने जल शोधन का यंत्र लगाने पर मजबूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों का हित सबसे ऊपर है और इसके लिए दूसरे पर आरोप लगाने की बजाय सबको मिलकर समस्या का हल खोजना चाहिए।