बुंदेलखंड में पिछले 15 वर्षों के दौरान केवल चार साल ही सामान्य से अधिक बारिश हुई है। शेष दस साल मानसून सामान्य बारिश के आंकड़े को छू भी नहीं पाया है। सूखे से सबसे अधिक नुकसान खरीफ की फसल को हुआ है।
गांवों में भारी जल संकट है, कुएं सूख चुके हैं, हैंडपंप भी साथ छोड़ रहे हैं। झांसी जिले में सामान्य बारिश का आंकड़ा 879.10 मिमी है। आंकड़ों के मुताबिक अधिक बारिश वर्ष 2001 व 2003 में हुई थी। इसके सात साल बाद वर्ष 2011 व इसके बाद 2013 में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
बाकी ग्यारह साल मानसून सामान्य बारिश तक पहुंचने से पहले ही विदा हो लिया। जिले में कम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान खरीफ की फसलों को हुआ। वर्षों से खरीफ फसलों के उत्पादन में पचास फीसदी से अधिक क्षति दर्ज की जा रही है।
मौसम विभाग ने इस बार सामान्य से अधिक बारिश की घोषणा की है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र के अनुसार आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी। मौसम विभाग के अनुमान से किसानों की उम्मीदें जगी हैं। हालांकि मानसून ने शुरुआत से अब तक निराश ही किया है। किसान नेता शिवनारायण परिहार के अनुसार किसानों को दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने में भी मुश्किल आ रही है।
जल संरक्षण के उपाय नहीं
झांसी। बुंदेलखंड में जल संरक्षण के उपायों पर ध्यान नहीं दिए जाने से बारिश का पानी बेकार चला जाता है। केंद्र सरकार ने 2009 मेें बुंदेलखंड को 7,266 करोड़ का पैकेज दिया था। इसका बड़ा हिस्सा जल संरक्षण पर खर्च होना था।
तालाब और चेक डैम बनाए जाने थे। सरकारी तंत्र की लापरवाही से खेत तालाब योजना शुरुआत में ही फेल हो गई, चेक डैम निर्माण की योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब प्रदेश सरकार ने फिर खेत तालाब योजना शुरू की है। इसके तहत जिले में ढाई सौ खेतों में तालाब बनने हैं। रेन वॉटर हार्वेस्ट़िग भी कागजों तक हर सीमित है। यहां तक कि कई सरकारी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं है।
साल वर्षा (मिमी में)
2001 - 942.22
2003 - 1153.00
2011 - 899.62
2012 - 726.44
2013 - 1288.88
2014 - 571.54
2015 - 543.94