जलवायु परिवर्तन की भयावहता अब समुद्री जीवन को भी तेजी से निगल रही है। गर्म होते महासागरों की वजह से प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ्स) अपने पारंपरिक निवास से पलायन कर रही हैं। इससे आने वाले दशकों में उनका अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
ताजा वैश्विक अध्ययन के अनुसार, यदि मौजूदा रफ्तार से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रहा तो इस सदी के अंत तक 86 फीसदी प्रवाल भित्तियां खत्म हो सकती हैं। ऐसा होने पर तटीय क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों लोगों की आजीविका सहित और कई तरह के संकट खड़े हो सकते हैं। हालांकि, उत्सर्जन नियंत्रण के ठोस कदम उठाए जाएं तो इस आपदा को काफी हद तक टाला जा सकता है। यह अध्ययन हवाई विश्वविद्यालय के हवाई इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन बायोलॉजी की इकोलॉजिकल थ्योरी लैब के वैज्ञानिकों ने किया है। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, जैसे-जैसे समुद्रों का तापमान बढ़ता है, प्रवाल भित्तियां ठंडे क्षेत्रों की ओर खिसक रही हैं, लेकिन उनकी यह गति अत्यंत धीमी है।
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बचाव की उम्मीदें और पेरिस समझौते की भूमिका
अध्ययन में कहा गया है कि अगर वैश्विक स्तर पर पेरिस जलवायु समझौते जैसे ठोस कदमों पर अमल किया जाए तो ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी लाई जा सकती है। इससे प्रवाल भित्तियों के नुकसान को मौजूदा आकलन के मुकाबले एक-तिहाई तक सीमित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है, हमारे अगले कुछ दशकों के निर्णय न केवल इस सदी बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों तक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य को तय करेंगे। प्रवाल भित्तियों की धीमी भागदौड़ जलवायु संकट की गंभीरता को उजागर करती है।
- उनका भविष्य अब पूरी तरह हमारे फैसलों पर निर्भर करता है। अगर हम अभी ठोस कदम नहीं उठाते तो न केवल एक सुंदर पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट होगा बल्कि मानवता भी एक अमूल्य प्राकृतिक रक्षा कवच खो देगी।
क्यों जरूरी हैं प्रवाल भित्तियां
प्रवाल भित्तियां, जिन्हें समुद्र का वर्षावन कहा जाता है, समुद्री जैव विविधता के केंद्र हैं। वे समुद्री जीवों को भोजन, आश्रय और प्रजनन स्थल प्रदान करती हैं। साथ ही वे तटीय क्षेत्रों की रक्षा करने, मछली पालन, पर्यटन और दवाओं के विकास में भी योगदान देती हैं। उनके बिना न केवल समुद्री जीवन में असंतुलन आएगा। इसके अलावा, प्रवाल भित्तियां कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को कम करने में मदद करती हैं।
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यहां बन सकती हैं भित्तियां
शोध में पाया गया कि भविष्य में उत्तरी फ्लोरिडा, दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी जापान जैसे ठंडे तटीय क्षेत्रों में नई प्रवाल भित्तियों का निर्माण हो सकता है। हालांकि, यह बदलाव इतनी धीमी गति से होगा कि वह मौजूदा संकट से प्रवालों को बचाने में कारगर साबित नहीं होगा।
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