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SC: 'मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं का सम्मान करता है वक्फ कानून', केंद्र ने शीर्ष कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

Fri, 25 Apr 2025 10:21 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

SC: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 मुस्लिमों की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है और पूजा-आस्था से जुड़ी बातों अछूता है। यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है, जो पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और प्रशासनिक सुधारों पर केंद्रित है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पूजा और आस्था से जुड़ी बातों को छेड़े बिना मुस्लिम समुदाय की जरूरी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है। शीर्ष कोर्ट में दायर एक प्रारंभिक हलफनामे में सरकार ने कहा कि इस अधिनियम में लाए गए सुधार पारदर्शिता, जवाबदेही, सामाजिक कल्याण और समावेशी शासन जैसे जरूरी उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं, जो संविधान और जनहित के मूल्यों के अनुरूप है। 

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केंद्र ने अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं क खारिज करने की मांग की और कहा कि यह संशोधित कानून सांविधानिक रूप से वैध है और यह पुरानी वक्फ व्यवस्था को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों के साथ जोड़कर औपचारिक, संगठित और आधुनिक बनाता है। सरकार ने कहा कि 2025 का यह कानून भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, प्रभावी और समावेशी तरीके से आधुनिक बनाने के उद्देश्य से पारित किया गया। 

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हलफनामे में कहा गया, यह अधिनियम मुस्लिम समुदाय की जरूरी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है, क्योंकि यह आस्था और पूजा के मामलों को बिल्कुल नहीं छूता, बल्कि संविधान के अनुरूप केवल वक्फ प्रबंधन के धर्मनिरपेक्ष और प्रशासनिक पहलुओं को नियंत्रित करता है। सरकार ने कहा कि यह सुधार केवल वक्फ संस्थाओं के धर्मनिरपेक्ष और प्रशासनिक पहलुओं (जैसे संपत्ति प्रबंधन, रिकॉर्ड रखने और प्रशासनिक ढांचे) से जुड़े हैं और इससे इस्लाम की जरूरी धार्मिक परंपराओं पर कोई असर नहीं पड़ता। 

इसमें आगे बताया गया कि अनुच्छेद 25 और 26 व्यक्ति या धार्मिक समूह को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं, लेकिन साथ ही राज्य को सामाजिक कल्याण और नियमन के लिए कानून बनाने की अनुमति भी देते हैं। सरकार ने यह भी साफ किया कि संशोधित अधिनियम वक्फ कैसे बनाए जाते हैं, किस उद्देश्य से बनाए जाते हैं और वे आंतरिक रूप से कैसे चलते हैं , इन सभी बातों से पूरी तरह अछूता है। सरकार ने यह भी कहा कि वक्फ की स्थापना, संचालन और प्रबंधन पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष प्रक्रिया है।

हलफनामे में कहा गया, हर वह गतिविधि जो धर्म से थोड़ी भी जुड़ी हो, उसे संविधान संरक्षण नहीं देता, केवल वही प्रथाएं जो धर्म के लिए मूल या आवश्यक हैं, वे ही अनुच्छेद 25 और 26 के तहत संरक्षित होती हैं। सरकार ने बताया कि पूरे भारत में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों (जैसे जमीन, इमारतें, और वित्तीय संपत्तियां) का प्रबंधन एक बड़ा धर्मनिरपेक्ष प्रशासनिक कार्य है। इसमें सही रिकॉर्ड रखना, गड़बड़ी रोकना और आय को सही काम में लगाना शामिल है।
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हलफनामे में बताया गया कि वक्फ संपत्तियां अनाथों, अस्पतालों, शिक्षा संस्थानों, स्कॉलरशिप, और गरीबों की मदद के लिए होती हैं। आजकल कैश वक्फ, कॉर्पोरेट वक्फ और वक्फ सुकूक (इस्लामिक बांड) जैसे नए रूप भी उभरे हैं। केंद्र ने कहा कि वक्फ का विचार धार्मिक संस्थाओं या पूजा स्थलों से अलग है। संसद ने यह संशोधन संविधान द्वारा दी गई शक्ति के तहत किया, ताकि धर्म से जुड़ी संपत्तियों के धर्मनिरपेक्ष, आर्थिक और प्रशासनिक हिस्सों में सुधार हो सके। अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अगुवाई वाली पीठ करेगी।

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