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Mallikarjun Kharge: 'रजाकारों की हिंसा में खोया परिवार, जंगल में काटी रातें', खरगे ने याद किए बचपन के कठिन दिन

Sat, 13 Jun 2026 11:08 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि रजाकारों की हिंसा में उन्होंने अपने परिवार के कई सदस्यों को खो दिया था और बचपन जंगल में पत्तों पर सोकर बिताया। खरगे ने बताया कहा कि कठिन संघर्षों के उन्होंने शिक्षा हासिल की और आगे चलकर कानून व राजनीति के रास्ते से होते हुए कांग्रेस अध्यक्ष बने। पढ़िए रिपोर्ट-
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मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को अपने बचपन के कठिन दिनों को याद किया। उन्होंने हैदराबाद राज्य में रजाकारों की हिंसा में अपनी मां सहित परिवार के कई सदस्यों को खो दिया था। उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें जंगल में पत्तों पर सोकर जीवन बिताना पड़ा था। 
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'कभी पत्तों गुजारी रातें, आज पैरों के नीचे कालीन'
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील व राजनेता कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान खरगे ने कहा कि आज उनके पैरों के नीचे कालीन बिछी होती है। लेकिन बचपन में उन्होंने जंगल में पत्तों पर सोकर रातें गुजारी हैं। खरगे ने बताया कि जब वह मात्र छह साल के थे, तब बीदर में रजाकारों के हमले में उन्होंने अपनी मां, भाई, बहन और चाचा को खो दिया था। उस समय उनके पिता खेत में काम कर रहे थे। घर को आग लगाकर परिवार के लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद उनके पिता उन्हें बचाकर गांव से बाहर ले गए।

'अपने ही रिश्तेदारों ने शरण देने से किया इनकार'
उन्होंने बताया कि गांव छोड़ने के बाद परिवार को अपने ही रिश्तेदारों ने शरण देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें निजाम की निजी सेना के डर से परेशानी का खतरा था। इसी कारण कई रातें उन्हें जंगल में बितानी पड़ीं। खरगे ने कहा कि उस समय वह और उनके पिता जंगल में पत्तों पर सोते थे, जबकि आज वह कालीन पर चलते हैं।
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राष्ट्रीय राजनीति में तक कैसे तय किया सफर?
उन्होंने अपनी विद्यालयी शिक्षा की कठिनाइयों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाद में वह कलबुर्गी पहुंचे, जहां एक व्यक्ति की मदद से उन्हें विद्यालय में दाखिला मिला। खरगे ने बताया कि उनके विद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शिक्षक भी थे और महात्मा गांधी की हत्या के बाद कई आरएसएस कार्यकर्ता पुणे से कलबुर्गी आए थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद उनकी जिंदगी में आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया।

खरगे ने अपने पिता को जीवन का सबसे बड़ा सहारा बताते हुए कहा कि उनके पिता ने परिवार खोने के बाद भी अपने इकलौते बेटे को बेहतर भविष्य देने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और मजदूर आंदोलन से जुड़े और धीरे-धीरे राजनीति में आगे बढ़ते हुए विधायक, सांसद और फिर कांग्रेस अध्यक्ष बने।
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