सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, ‘‘मिशेल अगस्ता वेस्टलैंड मामले में भारत में आपराधिक कार्यवाही से बच रहा था। उसे यूएई के प्राधिकारी भारत प्रत्यर्पित कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के दिशानिर्देश में समूचे अभियान का समन्वय सीबीआई के प्रभारी निदेशक राव कर रहे हैं।’’ मिशेल (57) दुबई में अपनी गिरफ्तारी के बाद से जेल में था और उसे यूएई में कानूनी और न्यायिक कार्यवाही के लंबित रहने तक हिरासत में भेज दिया गया था।
दुबई कोर्ट ऑफ कैसेशन ने मिशेल के वकील की ओर से दायर दो आपत्तियों को खारिज कर दिया और भारत के सक्षम प्राधिकारियों को उसे प्रत्यर्पित करने की संभावना पर विचार करने के अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखा। आरोप है कि मिशेल ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षडयंत्र रचा। सह आरोपी में तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एस पी त्यागी और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। षड्यंत्र के तहत लोक सेवकों ने वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की उड़ान भरने की ऊंचाई 6000 मीटर से घटाकर 4500 मीटर कर अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया। भारत सरकार ने आठ फरवरी 2010 को रक्षा मंत्रालय के जरिए ब्रिटेन की अगस्तावेस्टलैंड इंटरनेशनल लि को लगभग 55.62 करोड़ यूरो का ठेका दिया था।
प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि मिशेल अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर्स का ‘‘ऐतिहासिक परामर्शदाता’’ बताया जाता है जिसे हेलीकॉप्टर, सैन्य अड्डों और पायलटों की तकनीकी संचालनात्मक जानकारी थी। मिशेल 1980 के दशक से ही कंपनी के साथ काम कर रहा था और इससे पहले उसके पिता भी भारतीय क्षेत्र के लिए कंपनी के परामर्शदाता रह चुके थे। एजेंसी ने बताया कि वह कथित तौर पर बार-बार भारत आता रहता था और भारतीय वायुसेना तथा रक्षा मंत्रालय में सेवानिवृत्त तथा मौजूदा अधिकारियों समेत विभिन्न स्तरों पर सूत्रों के एक बड़े नेटवर्क के जरिए रक्षा खरीद के लिए बिचौलिए के तौर पर काम कर रहा था।