रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज यानी 6 दिसंबर को भारत के दौरे पर आ रहे हैं। पुतिन के पहुंचने से पहले पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु भी भारत पहुंच चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने अपने समकक्ष डॉ. एस जयशंकर और राजनाथ सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अब बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
राजनाथ बोले, सभी चुनौतियों से निपटने में भारत सक्षम
रूस के साथ 2+2 वार्ता में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महामारी, असाधारण सैन्यीकरण और हमारे पड़ोस में हथियारों का विस्तार और 2020 की गर्मियों की शुरुआत से हमारी उत्तरी सीमा पर पूरी तरह से अकारण आक्रामकता ने कई चुनौतियों का सामना किया है। रक्षा मंत्रालय से हमने अधिक सैन्य-तकनीकी सहयोग, उन्नत अनुसंधान, भारत की आत्मनिर्भरता के लिए रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन का आग्रह किया है। हमने मध्य एशिया और आईओआर में अधिक से अधिक जुड़ाव का प्रस्ताव दिया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत अपनी मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और अपने लोगों की अंतर्निहित क्षमता के साथ इन चुनौतियों पर काबू पाने के लिए पूरी तरह आश्वस्त है।
भारत और रूस के बीच असॉल्ट राइफल AK-203 सौदे पर लगी मुहर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने नई दिल्ली में आज एक बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच हुए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 6,01,427 7.63x39 मिमी असॉल्ट राइफल AK-203 की खरीद के लिए अनुबंध, 2021-2031 से सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए कार्यक्रम जैसे समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। वहीं बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उभरती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में आज वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन एक बार फिर हमारे देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण महत्व की पुष्टि करता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा सहयोग हमारी साझेदारी के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। मुझे उम्मीद है कि भारत-रूस साझेदारी पूरे क्षेत्र में शांति लाएगी और क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करेगी। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत और रूस के संबंध बहुपक्षवाद, वैश्विक शांति, समृद्धि, आपसी समझ और विश्वास में एक सामान्य हित के आधार पर आधारित हैं।
भारत ने रूस के समक्ष बिना उकसावे वाली आक्रामकता को चुनौती बताया
भारत ने रूस के समक्ष उत्तरी सीमा पर असाधारण सैन्यीकरण और बिना उकसावे वाली आक्रमकता को देश के लिए प्रमुख चुनौती बताया। 2+2 वार्ता के दौरान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और अपने लोगों की निहित क्षमताओं के कारण चुनौतियों से निकलने को लेकर आश्वस्त है। रक्षा मंत्री ने कहा कि महामारी के अलावा हमारे पड़ोस में असाधारण सैन्यीकरण, आयुधों का विस्तार और 2020 के जून यानी गर्मी के मौसम से हमारी उत्तरी सीमा पर बिना उकसावे की आक्रामकता से कई चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।
सैन्य और तकनीकी क्षेत्र में भारत-रूस का सहयोग महत्वपूर्ण: शोइगु
बैठक के दौरान रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने कहा कि हमारे देशों के संबंध के लिए इस समय सैन्य और तकनीकी क्षेत्र में भारत-रूस का सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आज अंतर सरकारी आयोग की बैठक में रक्षा क्षेत्र सहयोग के बारे में रक्षा मंत्री के साथ हमारी विस्तृत चर्चा हुई।
सर्गेई लावरोव और एस जयशंकर के बीच हुई बैठक
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आज नई दिल्ली में एक बैठक की। बैठक के दौरान डॉ. एस जयशंकर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ये हमारी चौथी बैठक है। ये भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। आज हमारे पास न केवल अपने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक स्थिति पर चर्चा करने का अवसर है बल्कि हम पहली 2+2 बैठक में भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन यूनिक इवेंट है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन विश्वास का रिश्ता साझा करते हैं। हम शिखर सम्मेलन से बहुत ही महत्वपूर्ण परिणामों की आशा कर रहे हैं। भारत-रूस के बीच साझेदारी यूनिक है। मुझे विश्वास है कि आज की वार्ता बहुत फलदायी होगी।
रूसी विदेश मंत्री से उपयोगी चर्चा हुई: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से मुलाकात के बाद ट्वीट कर कहा, मैं हमारे द्विपक्षीय रिश्तों में सतत सहयोग की तारीफ करता हूं। साझा हितों व चिंताओं पर बहुत उपयोगी बातचीत हुई।
राजनाथ सिंह ने रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु की अगवानी की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुषमा स्वराज भवन में रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु की अगवानी की। दोनों नेता आज भारत और रूस के बीच पहले 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद में हिस्सा लेंगे।
भारत और रूस के बीच इन मुद्दों पर होगी चर्चा
पुतिन की यात्रा के दौरान कई बड़े रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होंगे। दोनों देशों के बीच अगले दस साल तक रक्षा सहयोग जारी रखने और इसके लिए फ्रेमवर्क बनाने पर मुहर लगेगी। रक्षा सहयोग के लिए रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक एग्रीमेंट पर भी सहमति बनेगी। इसके अलावा सतह से हवा में मार करने वाली आधुनिकतम मिसाइल प्रणाली इग्ला-एस शॉल्डर फायर्ड मिसाइल सौदे पर भी बातचीत होगी।
एस-400 भारत की रक्षा क्षमताओं में करेगा इजाफा : रूसी विदेश मंत्री
रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीदी को लेकर रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि 'S-400' करार का सिर्फ प्रतीकात्मक अर्थ नहीं है। भारत की रक्षा क्षमताओं की दृष्टि से इसका बहुत महत्वपूर्ण व्यावहारिक अर्थ है। इसकी चर्चा पहले से चल रही थी, उसके बाद करार पर अमल किया गया है।
अमेरिका ने सहयोग को कमजोर करने का प्रयास किया
रूसी विदेश मंत्री ने कहा, 'हमने देखा कि अमेरिका ने भारत व रूस के बीच रक्षा सहयोग को कमजोर करने का प्रयास किया। उसने कोशिश की कि भारत अमेरिका का आदेश व उसका दृष्टिकोण माने कि इस क्षेत्र का किस तरह विकास होना चाहिए।
भारत ने अमेरिका को दिया सख्त जवाब
लावरोव ने कहा कि हमारे भारतीय मित्रों ने स्पष्ट रूप से और दृढ़ता से जवाब दिया कि वह संप्रभु देश है। वह तय करेगा कि कौनसे हथियार खरीदने हैं और किससे खरीदने हैं। रक्षा व अन्य मामलों में कौन भारत का साझेदार बनेगा।