मछुआरे निर्माण के दौरान तटीय भूमि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए समुद्र के कटाव के लिए पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। पिछले महीने भी सैकड़ों मछुआरों ने विरोध में राज्य की राजधानी में एक विशाल रैली निकाली थी।
केरल के विझिंजम में अदाणी बंदरगाह परियोजना का विरोध समाप्त हो गया है। इस परियोजना को लेकर विरोध में उतरे प्रदर्शनकारियों ने सीएम पिनरई विजयन के साथ आज हुई अंतिम चर्चा के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली। गौरतलब है कि मछुआरे निर्माण के दौरान तटीय भूमि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए समुद्र के कटाव के लिए पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। बता दें कि पिछले महीने भी सैकड़ों मछुआरों ने विरोध में राज्य की राजधानी में एक विशाल रैली निकाली थी और वाम सरकार पर उनकी मांगों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था।
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मिली जानकारी के मुताबिक, सीएम पिनरई विजयन के साथ आज हुई चर्चा में कई मांगो पर राज्य और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनी है। इस दौरान राज्य उन लोगों के लिए 5,500 रुपये का किराया प्रदान करने पर सहमत हो गया है जो समुद्र के कटाव के कारण अपना आवास खो देते हैं। इसके अलावा नावों के लिए ईंधन के लिए सब्सिडी और एक वर्ष में चल रहे पुनर्वास फ्लैटों को पूरा करने के लिए सहमत हुए हैं।
विरोध के बीच केरल हाईकोर्ट ने सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था
वहीं केरल हाईकोर्ट ने एक सितंबर को राज्य सरकार को अदाणी पोर्ट्स की निर्माणाधीन विझिंजम बंदरगाह परियोजना को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने प्रदर्शनकारियों को यह भी निर्देश दिया था कि वे बंदरगाह परिसर में अतिचार न करें और इसके बाहर शांतिपूर्वक आंदोलन करें। निर्माण कार्य बाधित न हो।
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प्रदर्शनकारियों का क्या हैं आरोप
प्रदर्शनकारी आरोप लगाते रहे हैं कि आने वाले विझिंजम बंदरगाह के हिस्से के रूप में ग्रोयन्स का अवैज्ञानिक निर्माण हो रहा है। जिससे आने वाले समय में मछुआरों को भारी नुकसान हो सकता है।