विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने विवाह के लिए जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ला जा रहे नए कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच विवाह के खिलाफ नहीं है बल्कि यह धार्मिक पहचान छिपाकर शादी के लिए फंसाई जा रही नाबालिग लड़कियों के हित और अधिकारों की सुरक्षा के लिए लाया जा रहा है।
संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष ने कानून का किया स्वागत
विहिप नेता ने कहा कि कानून में ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है लेकिन यह अविरत जनसांख्यिकीय आक्रामकता की हकीकत है। उन्होंने दावा किया कि विवाह के लिए धर्म परिवर्तन का मकसद समुदाय की जनसंख्या बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का नया कानून अंतर धार्मिक विवाहों पर रोक लगाने के लिए नहीं है। न ही यह धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है लेकिन यह जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए है। सभी को इसका समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन के खिलाफ सबसे पहले कानून बनाने वाले राज्य गैर भाजपा शासित मध्य प्रदेश और ओडिशा थे। उन्होंने कहा कि मानव गरिमा के अनुकूल कानून बनने चाहिए। क्या यह सही और वैध है कि अपनी पहचान छिपाकर स्कूल जाने वाली नाबालिग लड़कियों को फंसाया जाए और उनकी भावना का इस्तेमाल अपने मकसद के लिए किया जाए? क्या कोई सभ्य समाज इसकी अनुमति देगा? उन्होंने कहा कि विवाह के लिए धर्म परिवर्तन एक संगठित गतिविधि है और इसके लिए विदेशी एजेंसियां फंड कर रही हैं।