विहिप नेता बंसल ने कहा कि कर्नाटक सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस का हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इससे यह एक बार फिर साबित हो गया कि कांग्रेस धर्म परिवर्तन गिरोह के साथ खड़ी है। उनका सहयोग कर रही है। कांग्रेस हिंदुओं के शोषण वाले एजेंडे पर अब भी कायम है।
कर्नाटक सरकार द्वारा धर्मांतरण विरोधी कानून रद्द करने के फैसले के बाद से देशभर में विवाद शुरू हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि सिद्धारमैया सरकार के फैसले ने कांग्रेस के हिंदू विरोधी और देश विरोधी छवि पर मुहर लगा दी है।
एक दिन पहले कर्नाटक सरकार ने लिया फैसला
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गुरुवार को कर्नाटक में कैबिनेट बैठक के बाद कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने संवाददाताओं को बताया था कि बैठक में भाजपा के समय लाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून पर चर्चा हुई। इसे रद्द करने के लिए सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में बिल लाएगी। इसके अलावा पाटिल ने कहा कि कन्नड और सोशल साइंस की पाठ्य पुस्तकों से हेडगेवार और सावरकर के पाठों को भी हटाया जाएगा।
विहिप नेता विनोद बंसल ने कहा कि कर्नाटक सरकार के फैसले के बाद कांग्रेस का हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। इससे यह एक बार फिर साबित हो गया कि कांग्रेस जबरन धर्म परिवर्तन करवाने वाले गिरोह के साथ खड़ी है। उनका सहयोग कर रही है। कांग्रेस हिंदुओं के शोषण वाले एजेंडे पर अब भी कायम है। कर्नाटक की जनता इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती। विहिप, बजरंग दल और पूरा हिंदू समाज राज्य में प्रदर्शन करेगा। हम कांग्रेस के चेहरे को बेनकाब करेंगे।
महाराष्ट्र भाजपा नेताओं ने भी साधा निशाना
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने भी कांग्रेस सरकार पर हमला किया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के फैसले पर उद्धव ठाकरे से सवाल किया है। उन्होंने कहा कि ठाकरे को कर्नाटक सरकार के फैसले पर अपना रुख साबित करना होगा। पाठ्यक्रमों में बदलाव और धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने के फैसले पर उन्हें अपना विचार व्यक्त करना चाहिए। कांग्रेस को वोट देना, पंजे का बटन दबाना कितना खतरनाक होता है, यह भारत और महाराष्ट्र की जनता ने देखा है। भारत तोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में उन्होंने दो-तीन बार वीर सावरकर जी का अपमान किया था। इसी के साथ उन्होंने कहा था कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम सावरकर का और अपमान करेंगे और उन्होंने किया। राहुल गांधी ने आदेश दिया और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सावरकर और हेडगेवार के इतिहास को पाठ्यपुस्तक से हटा दिया।