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Sign Language: '10 हजार शब्दों का शब्दकोश तैयार', सांकेतिक भाषा पर मंत्री बोले- दिव्यांगों को अवसर देना जरूरी

Tue, 23 Sep 2025 05:41 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सांकेतिक भाषा दिवस पर कहा कि समावेशन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक संगठनों की साझेदारी भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि ने 10,000 शब्दों का शब्दकोश और 2,300 से अधिक वीडियो तैयार किए हैं।

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भाजपा नेता वीरेंद्र कुमार। - फोटो : X-@Drvirendrakum13 (वीडियो ग्रैब)
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विस्तार
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि विकलांग बच्चों को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि समावेशन केवल सरकार की कोशिशों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक और शैक्षिक संगठनों की भी अहम भूमिका है। वे भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र द्वारा आयोजित सांकेतिक भाषा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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मंत्री ने कहा कि भारतीय सांकेतिक भाषा को मजबूत करने के प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विज़न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, उन्हें सिर्फ अवसरों की जरूरत है।

आईएसएलआरटीसी  की उपलब्धियां
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि आईएसएलआरटीसी ने अब तक 10,000 शब्दों की सांकेतिक भाषा शब्दकोश तैयार किया है, 2,300 से ज्यादा वीडियो बनाए हैं और नए डिप्लोमा व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि शिक्षक और दुभाषियों को प्रशिक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से छात्रों को नए शैक्षिक रास्ते मिलेंगे और शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति होगी।
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प्रेरणादायक उदाहरण और भावुक क्षण
मंत्री ने हाल ही में राष्ट्रपति द्वारा देहरादून स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द विजुअली हैंडीकैप्ड की यात्रा का ज़िक्र किया। यहां दृष्टिबाधित बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए जन्मदिन गीत गाया था। मंत्री ने कहा कि इन बच्चों की मीठी आवाज़ से राष्ट्रपति भावुक हो गए थे। यह उदाहरण बताता है कि यदि कुछ कमी है, तो ईश्वर ने अन्य क्षमताओं से बच्चों को विशेष बनाया है।

समावेशन में समाज की भूमिका अहम
कुमार ने स्पष्ट किया कि समावेशन केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक और शैक्षिक संस्थानों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चाहे किसी क्षेत्र में बच्चों की संख्या अधिक हो या कम, सभी को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण का समान लाभ मिलना चाहिए।

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‘सबका साथ, सबका विकास’ से जुड़ी सोच
प्रधानमंत्री मोदी के विकास एजेंडे का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि *सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास* का अर्थ है कि विकलांग बच्चों को भी पीछे नहीं छोड़ा जाए। वे भी आत्मनिर्भर बनें और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान दें। उन्होंने समाज से अपील की कि सभी लोग सांकेतिक भाषा को अपनाएं और इसे सम्मान और समावेशन की साझा भाषा बनाएं।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का वीडियो संदेश भी प्रसारित हुआ। उन्होंने सांकेतिक भाषा दिवस को *समावेशन का उत्सव बताया और कहा कि डिजिटल आईएसएल संसाधनों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और टेलीविजन प्रसारणों का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे कक्षाओं में पहुंच और अधिक समावेशी बन रही है।

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