मुंबई लोकल ट्रेन में हुई हत्या के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एक वायरल वीडियो की मदद से राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने वारदात में इस्तेमाल किया गया कथित चाकू बरामद कर लिया। एक होटल प्रबंधक ने पुलिस को जानकारी दी कि उसके एक कर्मचारी को अनजाने में यह चाकू मिला था।
इस बीच, एक मजिस्ट्रेट अदालत ने मंगलवार को आरोपी रोशन सुवर्णा की पुलिस हिरासत छह जुलाई तक बढ़ा दी। पुलिस ने आगे की जांच के लिए सात दिन की अतिरिक्त हिरासत की मांग की थी।
कहां से खरीदा था हत्या में इस्तेमाल चाकू?
रोशन सुवर्णा पर आरोप है कि उसने पिछले सप्ताह अंधेरी और बोरीवली रेलवे स्टेशनों के बीच चल रही एक लोकल ट्रेन के प्रथम श्रेणी डिब्बे में 22 वर्षीय सहयात्री मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। दोनों के बीच ट्रेन का दरवाजा बंद रखने को लेकर विवाद हुआ था।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान सुवर्णा ने बताया कि वह पिछले चार-पांच महीनों से चाकू अपने बैग में रखकर चल रहा था। उसका दावा है कि करीब सात महीने पहले उसने यह मैरून रंग के हैंडल वाला धारदार चाकू अमेजन के एक गोदाम से लिया था, जहां उसका एक दोस्त काम करता था।
क्यों नहीं मिल पाया था आला-ए-कत्ल?
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में कहा था कि बोरीवली रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद उसने चाकू फेंक दिया था। हालांकि, उसके बताए स्थान पर तलाश करने के बावजूद पुलिस को शुरुआत में हथियार नहीं मिला।
जांच में उस समय अहम मोड़ आया जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो देखने के बाद बोरीवली के एक रेस्तरां प्रबंधक ने पुलिस से संपर्क किया। उसने बताया कि उसके एक कर्मचारी को खरीदारी के दौरान बोरीवली स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-दो और तीन के पास एक गली में चाकू मिला था।
कर्मचारी को यह अंदाजा नहीं था कि चाकू का इस हत्या से कोई संबंध हो सकता है। इसलिए वह उसे रेस्तरां के स्टाफ रूम में ले गया और एक गत्ते के डिब्बे में रख दिया। बाद में पुलिस ने वहां से चाकू बरामद किया। पुलिस का कहना है कि यही चाकू हत्या में इस्तेमाल किया गया था।
कोर्ट ने बढ़ाई आरोपी की पुलिस हिरासत
अदालत को पुलिस ने बताया कि यह पता लगाने के लिए आरोपी से और पूछताछ जरूरी है कि वह कई महीनों से चाकू क्यों लेकर घूम रहा था और क्या उसने इसका इस्तेमाल पहले किसी अन्य अपराध में भी किया था। पुलिस ने कहा कि हत्या के पीछे के मकसद की भी जांच की जानी है।
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता जयवंत पाटिल ने पुलिस हिरासत बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पुलिस पहले भी रिमांड मांगते समय यही कारण बता चुकी है और उसे अपराध के पीछे का मकसद पता लगाने के लिए पर्याप्त समय मिल चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने रोशन सुवर्णा की पुलिस हिरासत छह जुलाई तक बढ़ा दी।