वहीं, महामारी के बीच अस्पतालों में सांसदों और विधायकों को अस्पताल में मिल रहे वीआईपी इलाज को लेकर फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (फोरडा) ने भी नाराजगी जताई है। फोरडा ने इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र में लिखा है कि नेताओं की दखलअंदाजी से सेवाएं प्रभावित होती हैं और जरूरतमंद मरीज वंचित रह सकते हैं।
फोरडा ने मांग की कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वह अपने इलाज के लिए उन्हीं संस्थानों में जाएं जो उन्हें विशेष तौर पर आवंटित किए गए हैं। सेवाएं बेहतर करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करें और पर्याप्त वर्कफोर्स की व्यवस्था करें। स्वास्थ्यकर्मियों और पैरामेडिकल कर्मियों के इलाज के लिए भी एक विशेष स्थान निर्धारित किया जाए। जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों पर रोक लगाई जाए।