मणिपुर के कांगपोकपी जिले के लांगका नागा गांव में शुक्रवार सुबह कथित उग्रवादियों ने गोलीबारी की, जिसमें 34 वर्षीय डब्ल्यू. चावांग की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसके बाद एक नागा सशस्त्र समूह ने भी जवाबी गोलीबारी की। घटना ऐसे समय हुई है जब मणिपुर मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण लगातार सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है।
सुबह-सुबह गांव पर हुआ हमला
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों का एक समूह कथित तौर पर सुबह करीब 8 बजे लांगका नागा गांव में घुसा और गोलीबारी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी में डब्ल्यू. चावांग नाम के 34 वर्षीय व्यक्ति को सिर में गोली लगी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमले में गांव के तीन अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
नागा सशस्त्र समूह ने भी की जवाबी गोलीबारी
स्थानीय लोगों का दावा है कि हमले के बाद नागा गांव के एक सशस्त्र समूह ने भी संदिग्ध उग्रवादियों पर जवाबी गोलीबारी की। हालांकि, इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कितनी देर तक गोलीबारी हुई और इसमें कितने हथियारों का इस्तेमाल किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी तत्काल सामने नहीं आई है। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं और किसी भी संभावित हिंसक घटना को रोकने के लिए निगरानी रखी जा रही है।
मणिपुर में तीन साल से जारी है जातीय हिंसा
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। हिंसा ने राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से सुरक्षा बल राज्य के सभी जिलों के बाहरी और संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रण बनाए रखने के लिए अभियान भी जारी हैं।
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हाल के दिनों में भी सामने आईं हिंसक घटनाएं
मणिपुर में हाल के महीनों में भी छिटपुट गोलीबारी, सशस्त्र समूहों के बीच झड़प और संवेदनशील इलाकों में तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद कई इलाकों में हथियारबंद समूहों की गतिविधियां सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं।