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दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में बडे़ पैमाने पर हिंसा और आगजनी

Thu, 13 Jul 2017 10:11 PM IST
रीता तिवारी/ दार्जिलिंग
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darjeeling
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गोरखा जनमुक्ति मोर्चा समर्थकों ने अलग राज्य की मांग में आंदोलन तेज करते हुए बृहस्पतिवार को दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के एक दफ्तर के अलावा एक रेलवे स्टेशन को फूंक दिया। उन्होंने दार्जिलिंग स्टेशन पर कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की।
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आंदोलनकारियों ने पर्यटन मंत्री गौतम देब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके काफिले में शामिल पुलिस की एक कार पर भी पथराव किया। पर्वतीय क्षेत्र में जारी बंद का आज 29वां दिन था। दूसरी ओर, पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक दार्जिलिंग माल पर आयोजित एक समारोह में इलाके के तीन लेखकों व कलाकारों ने राज्य सरकार की ओर से मिले पुरस्कार लौटा दिए।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि गोरखालैंड समर्थकों ने बृहस्पतिवार तड़के माल रोड पर स्थित जीटीए के पर्यटन दफ्तर में आग लगा दी। इससे पहले बीती रात कुछ अज्ञात हमलावरों ने दार्जिलिंग स्टेशन के पास पार्क की गई सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। गोरखा मोर्चा समर्थकों ने इलाके के गयाबाड़ी में रेलवे स्टेशन के अलावा तीस्ता नदी के पास बने जंगल विभाग के एक बंगले में भी आग लगा दी।
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इसके अलावा लिंबू और तामंग विकास बोर्ड के दफ्तरों, पंचायत विभाग के एक दफ्तर और रेवेन्यू इंस्पेक्टर के दफ्तर को भी फूंक दिया गया। बृहस्पतिवार को नेपाली कवि भानुभक्त की जयंती के मौके पर हजारों लोगों ने रंग-बिरंगे पोेशाक पहन कर रैली निकाली। रैली में शामिल लोगों ने अपने हाथों में गोरखालैंड के समर्थन में पोस्टर व बैनर ले रखे थे।

पर्वतीय इलाके के तमाम संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर गठित गोरखालैंड मांग समन्वय समिति ने दो दिन पहले हुई अपनी बैठक में तमाम सरकारी पुरस्कार लौटाने और 15 जुलाई से आमरण अनशन शुरू करने का फैसला किया था। इसी के अनुरूप आज लेखक कृष्ण सिंह मोक्तान, शिक्षाविद् प्रभात प्रधान और गायक कर्मा योंजन ने अपने-अपने अवार्ड लौटा दिए।

आंदोलनकारियों ने आज सुबह मिरिक इलाके में पर्यटन मंत्री गौतम देब के काफिले पर भी हमला किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि देब कवि भानुभक्त जयंती के मौके पर आयोजित एक समारोह में शिरकत करने जा रहे थे। आंदोलनकारियों ने सड़क पर अवरोधक रख दिए और काफिले के रुकने पर पुलिस की एस्कार्ट कार पर पथराव किया।

सुरक्षाकर्मियों ने मंत्री को बचाया और उसके बाद उन्होंने नजदीकी सेना शिविर में शरण ली। पथराव में मंत्री की कार को भी नुकसान पहुंचा है। मंत्री ने बाद में पत्रकारों से कहा कि यह कोई लोकतांत्रिक आंदोलन नहीं है। उन्होंने केंद्र पर इस गुंडागर्दी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, गोरखा मोर्चा के नेताओं ने हिंसा, आगजनी और मंत्री के काफिले पर हमले में अपने कार्यकर्ताओं का हाथ होने से इंकार करते हुए असली अपराधियों का पता लगाने के लिए तमाम घटनाओं की सीबीआई जांच की मांग की है। मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने कहा कि उनकी पार्टी अलग राज्य की मांग में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रही है और हिंसा व आगजनी की घटनाओं से उसका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग गोरखालैंड राज्य की गठन ही पर्वतीय इलाके की समस्याओं का एकमात्र समाधान है।
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