बता दें कि पहले विनेश फोगाट, 53 किलोग्राम के वेट में खेलती थीं। बाद में वे पचास किलोग्राम पर आई थीं। ओलंपिक में विनेश ने छह अगस्त की रात को महिला कुश्ती के 50 किलोग्राम के भार वर्ग मुकाबले में क्यूबा की पहलवान को शिकस्त दी थी। इसके बाद विनेश की तरफ से गोल्ड या सिल्वर मेडल जीतने की उम्मीद बंध गई थी। कुश्ती के कोच दर्शन पाराशर कहते हैं, ओलंपिक में वजन का बहुत अहम रोल होता है। कई बार खिलाड़ी की लापरवाही की वजह से वजन कम या ज्यादा हो जाता है। हालांकि जो खिलाड़ी, ओलंपिक में गोल्ड/सिल्वर जीतने की दहलीज पर पहुंच गई हो, वहां पर ऐसी लापरवाही/चूक हो, ऐसी संभावना न के बराबर है। खुद पहलवान भी बहुत गंभीर रहता है।
बतौर कोच दर्शन, मुकाबले से पहले महिला पहलवान का वजन होता है। दिन के मुकाबले के लिए अमूमन सुबह वजन किया जाता है। यह वजन तकनीकी टीम की देखरेख में होता है। कोच वहां पर मौजूद रहता है। यहां पर देखने वाली बात यह है कि आखिर ये चूक किसके स्तर पर हुई है। पहलवान को मालूम होता है कि उसका वजन कम या ज्यादा हुआ है। ऐसे में वह उसे बैलेंस करने का प्रयास करता है। कई बार ऐसा भी होता है कि तकनीकी टीम या कोच से कुछ बातें छिपा ली जाएं। पहलवान अपने स्तर पर ही वजन को तय सीमा में लाने का प्रयास करता है। ऐसे मामले में कई बार गलती हो जाती है। यहां पर चूक तो हुई है। इसका जिम्मेदार कौन है, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
महिला पहलवान पूजा ढांढा कहती हैं कि खिलाड़ी को एक तय समय सीमा में ही वजन देता होता है। उस सीमा को आगे पीछे नहीं किया जा सकता है। पहलवान वजन देने में देरी करता है, तो भी वजन लेने से मना किया जा सकता है। अगर मैच जीत कर कोई खिलाड़ी सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंचता है, तो सुबह के वक्त उसका वजन किया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि खिलाड़ी के प्रयास करने के बाद भी वजन कम नहीं होता। दूसरा, पहले से ही अगर वजन एक दो किलो बढ़ा है, तो वह कम करना मुश्किल होता है। विभिन्न परिस्थितियों में तेजी से वजन गिरना बंद हो जाता है। प्रेक्टिस के बाद भी वजन कम नहीं होता। खून देने या बाल कटाने जैसी बातों से ज्यादा वजन कम नहीं होता। संभव है कि किसी कारण से वजन ग्राम में नहीं, बल्कि किलो में बढ़ गया हो। जब उसे कम करने के लिए मेहनत की जाती है तो वह कुछ ग्राम बच गया हो।