राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक स्थानीय नेता शुक्रवार को दावा किया कि उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले के कुछ गांवों ने मांग की है कि उन्हें गुजरात में शामिल किया जाना चाहिए। एनसीपी नेता के मुताबिक, सरकार की उदासीनता और कम विकास के कारण लोग यह मांग कर रहे हैं।
यह मांग ऐसे समय में की गई है जब हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने यह दावा करते हुए विवाद खड़ा किया है कि दक्षिण महाराष्ट्र के जाट तहसील के कुछ गांव कर्नाटक में अपना विलय चाहते हैं।
एनसीपी के सुरगना तालुका प्रमुख चिंतमन गावित ने कहा, आजादी के 75 वर्षों के बाद भी कई गांवों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। अगर आप इनका विकास नहीं कर सकते हैं तो उनका गुजरात में विलय कर दीजिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 30 नवंबर को तहसीलदार सचिन मुलिक को एक ज्ञापन भी भेजा है।
उन्होंने आगे कहा, इस मांग का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। सुभाष नगर, डोलारे, अलानगुन और कथिपडा गांवों के निवासी एकजुट होकर यह मांग कर रहे हैं। इसी तरह अन्य गांव भी हैं। गुजरात के धरमपुर तालुका यहां से मात्र 15 किलोमीटर और वसदा 10 किलोमीटर दूर है। हम लगातार वहां जाते हैं और हम वर्षों से विकास के अंतर को देख रहे हैं।
गावित ने दावा कि उन्हें नंदपुर जिले के धडगांव और नवापुर गांवों से भी फोन कॉल आए हैं और अपने गुजरात में विलय की मांग उठाई है। नासिक और नंदुरबार जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी हैं। राकांपा नेता ने कहा, हमने चार दिसंबर को पंगरने गांव में एक बैठक बुलाई है, जहां आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में अच्छी सड़कें, बिजली आपूर्ति, पानी और परिवहन की सुविधाएं हैं।
उन्होंने कहा, महाराष्ट्र की तरफ अच्छी सड़कें नहीं हैं, 24x7 बिजली नहीं है और लोगों को हर साल पानी की कमी का सामना करना पड़ता। कोई सिंचाई परियोजना नहीं है। नतीजतन, खेती पूरी तरह से मानसून पर निर्भर करती है। लोग वर्षों से आजीविका के लिए पलायन कर रहे हैं। तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र सरकार को या तो विकास की कमी को पूरा करना चाहिए या इन गांवों को गुजरात में विलय करने की अनुमति देनी चाहिए।
गावित ने कहा, पानी की कमी हमारी मुख्य समस्या है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हमारे तालुका में केवल एक फीसदी सिंचाई है। बोरगांव बांध को छोड़कर कोई बड़ी परियोजना नहीं है। लोग मानसून में खेती करते हैं और आजीविका कमाने के लिए निफाड़, चंदवाड़ और पिंपलगांव जैसी जगहों के लिए निकल जाते हैं।
उन्होंने कहा, स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी एक और मुद्दा है। 1971 में तत्कालीन सांसद हरिभाऊ महाले ने तीस बिस्तरों वाले ग्रामीण अस्पताल का उद्घाटन किया था। तबसे वहीं क्षमता बनी हुई है। न डॉक्टर हैं, न नर्स हैं और स्थिति दयनीय है। इसके विपरीत, गुजरात के वास्डा तालुका के धरमपुर में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि लो-वोल्टेज बिजली आपूर्ति के कारण लोग अपने सिंचाई पंप भी नहीं चला सकते हैं और मानसून में लगातार आठ दिनों तक बिजली नहीं आती है। गावित ने कहा, कोई मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य उच्च शिक्षा सुविधाएं भी नहीं हैं।
राउत ने भाजपा-शिंदे सरकार पर साधा निशाना
राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कुछ सार्वजनिक हस्तियों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर चुप्पी साधे रखने के लिए शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि मराठा योद्धा के इस अपमान का बदला लिया जाएगा। कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद को लेकर महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे नीत सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री वर्तमान सरकार के मुंह पर थूक रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार का कोई स्वाभिमान नहीं है।