रिपोर्ट में कहा गया है कि खपत में बढ़ोतरी हो रही है। प्रति व्यक्ति आय 2025 तक 10.2 फीसदी बढ़कर 2,66,500 रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। विवेकाधीन खर्च का अनुपात भी 2025 तक बढ़कर 45 फीसदी हो जाने का अनुमान है, जो अभी 35 फीसदी पर है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवारों का आकार छोटा होने के कारण घरों की बढ़ती संख्या से भी मांग में बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
रिटेल व ई-कॉमर्स का हो रहा तेजी से विस्तार
डिलॉई इंडिया के साझेदार रजत वाही ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वस्थ विकास और देश में में अनुकूल जनसांख्यिकी कारकों से रिटेल, उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तु (सीपीजी) और ई-कॉमर्स क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं रिपोर्ट के अनुसार रिटेल उद्योग का विकास अगले चार साल तक सालाना 10 फीसदी से अधिक रफ्तार से होने का अनुमान है।
इसका आकार 2017 के 795 अरब डॉलर से बढ़कर 2021 तक 1,200 अरब डॉलर का हो जाएगा। इसी अवधि में ई-कॉमर्स बाजार का आकार 30 फीसदी से अधिक विकास के साथ 2021 तक 80-120 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है, जो अभी 24 अरब डॉलर का है।