महाराष्ट्र के कई इलाकों में लोग जिंदगी के लिए पानी की एक-एक बूंद के लिए तरश रहे हैं और पानी की आवश्यकता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई इलाकों में तो हालात बदतर हो चले हैं।लातूर में दम तोड़ चुकी गांव की एक नदी को फिर से जिंदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। ग्रामीणों ने लातूर की सूख चुकी मंजीरा नदी को जिंदा करने के लिए फिर एक अभियान चलाया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक त्रिम्बादासजी जावर (62 साल) वे पुराने दिन याद करते हैं जब वीकेंड पर हरे-भरे गांव में जाकर खूब मौज-मस्ती की जाती थी। तब मंजीरा नदी में पर्याप्त पानी हुआ करता था।
त्रिम्बादासजी जावर आगे बताते हैं, 'मैं प्रकृति की खूबसूरती में खो जाता था और नदी को बहते हुए देखा करता था। उस वक्त यह एक प्रसिद्घ पिकनिक स्पॉट हुआ करता था, लोग यहां आते थे और नाव में घूमकर नदी की खूबसूरती को खूब आनंद लेते थे।
वे बताते हैं कि समय के साथ ' धीरे-धीरे भूमिगत जल का स्तर गिरता गया और नदी सूखती गई। इससे लातूर के लोगों के पानी की जरूरतें भी प्रभावित होने लगी। लातूर पर अब जल संकट का खतरा बढ़ता गया।