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सूखे लातूर में दम तोड़ चुकी मंजीरा को किया था जिंदा, फिर शुरू हुई कोशिशें

Tue, 10 May 2016 04:05 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला,नई दिल्ली
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महाराष्ट्र के कई इलाकों में लोग जिंदगी के लिए पानी की एक-एक बूंद के लिए तरश रहे हैं और पानी की आवश्यकता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई इलाकों में तो हालात बदतर हो चले हैं।लातूर में दम तोड़ चुकी गांव की एक नदी को फिर से जिंदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। ग्रामीणों ने लातूर की सूख चुकी मंजीरा नदी को जिंदा करने के लिए फिर एक अभियान चलाया।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक त्रिम्बादासजी जावर (62 साल) वे पुराने दिन याद करते हैं जब वीकेंड पर हरे-भरे गांव में जाकर खूब मौज-मस्ती की जाती थी। तब मंजीरा नदी में पर्याप्त पानी हुआ करता था।

त्रिम्बादासजी जावर आगे बताते हैं, 'मैं प्रकृति की खूबसूरती में खो जाता था और नदी को बहते हुए देखा करता था। उस वक्त यह एक प्रसिद्घ पिकनिक स्पॉट हुआ करता था, लोग यहां आते थे और नाव में घूमकर नदी की खूबसूरती को खूब आनंद लेते थे।
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वे बताते हैं कि समय के साथ ' धीरे-धीरे भूमिगत जल का स्तर गिरता गया और नदी सूखती गई। इससे लातूर के लोगों के पानी की जरूरतें भी प्रभावित होने लगी। लातूर पर अब जल संकट का खतरा बढ़ता गया।
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मंजीरा को जिंदा करना ही एकमात्र उम्मीद

लातूर में जब बूंद-बूंद के लिए लोग तरशने को मजबूर होने लगे और हालात भयावह होते चले गए। सरकार की कोशिशे नाकाफी होने लगी तो ग्रीमीणों ने मंजीरा नदी को जिंदा करने की ठान ली और उम्मीद के साथ 'जल जागृति अभियान- जल युक्त लातूर' शुरू किया।

मंजीरा नदी को दोबारा जीवित करने की मुहिम महादेव गोमारे और मार्कंड जाधव ने की। ये दोनों ही आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुयायी हैं। उन्होंने यह अभियान फरवरी 2013 में शुरू किया। दोनों ने बेंगलुरु में एक कैंप के दौरान मराठवाड़ा के सरपंचों को इस अभियान के लिए राजी किया।

 गोमारे ने कहा, कि शुरुआत में 'लोगों को उनकी मुहिम पर संदेह था लेकिन हमने हार नहीं मानी। बताते हैं कि उन्होंने फैसला किया कि गुरु जी की योजना को लातूर के कम से कम तीन गांवों में जरूर लागू करेंगे।'

बता दें कि वे अब वह इस प्रॉजेक्ट की सफलता के लिए रोजाना 18 घंटे काम करते हैं। प्रॉजेक्ट के तहत साई बैराज से लेकर 18 किलोमीटर तक के दायरे की सफाई करना और इसकी क्षमता को 18.5 घनमीटर बढ़ाना। लातूर को हर साल 18.25 घनमीटर पानी की जरूरत पड़ती है। अब योजना है कि नदी से 45 लाख घनमीटर बालू और गाद निकाला जाएगा।

इस अभियान से भूमिगत जल्‍स्तर बढ़ा है बोरवेल और कुंओं का पानी बढ़ा। और देखते ही देखते गांव में हरियाली छा गई। धीरे-धीरे कई गांव इस मुहिम का हिस्सा बन गए।ग्रामीणों की भागीदारी के चलते स तरह के 50 छोटे प्रॉजेक्ट पूरे कर लिए गए।

हालांकि आर्ट ऑफ लिविंग ने प्रॉजेक्ट को फंड दिया है लेकिन लोगों ने भी अपना पैसा लगाया है। लोगों की भागीदारी से इस तरह के 50 छोटे प्रॉजेक्ट पूरे कर लिए गए। लेकिन खराब मॉनसून के कारण मंजीरा नदी फिर सूख गई। अब एक बार फिर से आर्ट ऑफ लिविंग और ग्रामीणों ने सूखी नदी को दोबारा जिंदा करने की ठानी ली है।

एक बार फिर इसके लिए आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने एक करोड़ रुपये फंड भी दे दिया है। वहीं कई संगठनों और लोगों ने श्रमदान करने का प्रस्ताव भी रखा है। अभियान से जुड़े गोमारे बताते हैं कि बीते 8 अप्रैल को जिला कलेक्टर पांडुरंग पोल ने योजना का शुभारंभ किया। हम लोगों ने कुल 3 करोड़ रुपए का इंतजाम किया है। कई स्वयंसेवी संगठनों और लोगों ने योजना के लिए 5 करोड़ रुपए तक देने के लिए प्रतिबद्घ हैं। लोगों के सहयोग से एक बार फिर से लातूर की मंजीरा को जिंदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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