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Budget: ग्राम न्यायालयों के फंड में देखी गई कमी, आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो करोड़ रुपये किए गए आवंटित

Sun, 02 Feb 2025 05:57 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

1986 में कानून आयोग ने नागरिकों को उनके दरवाजे पर सस्ती और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए ग्राम न्यायालयों को स्थापित करने का सुझाव दिया था।
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court room - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मली सीतारमण ने शनिवार एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया। इस बार ग्राम न्यायालयों को फंड आवंटन में भारी कमी देखी गई है। केंद्रीय कानून मंत्रालय की ग्राम न्यायालय योजना को आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 2024-25 में इस योजना को 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वित्तीय कमी के कारण ग्राम अदालतों को अपने उद्देश्य को पूरा करना में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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1986 में कानून आयोग ने नागरिकों को उनके दरवाजे पर सस्ती और त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए ग्राम न्यायालयों को स्थापित करने का सुझाव दिया था। यह कानून सामाजिक, आर्थिक या अन्य कारणों से किसी को भी न्याय हासिल करने के अवसरों को सुनिश्चित करता है। 

कुछ रिपोर्टों का हवाला देते हुए कानून मंत्रालय ने संसद में बताया कि इन ग्राम न्यायालयों की स्थापना में धीमी प्रगति के कारणों में कई राज्यों में न्यायाधिकारी के पद को न भरना, सरकारी अभियोजकों, नोटरी की अनुपलब्धता और प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेटों की कमी शामिल है। सरकार ने कहा कि ग्राम न्यायालयों का सीमित आर्थिक क्षेत्राधिकार, राज्यों से अपर्याप्त वित्तीय सहायता और सामुदायिक जागरूकता की कमी ग्राम न्यायालयों की वर्तमान स्थिति के लिए अन्य कारण थे। केंद्र ने एक बार उपाय के रूप में प्रति ग्राम न्यायालय को 18 लाख रुपये प्रदान किए। 
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पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने ग्राम न्यायालय स्थापित करने के लिए केंद्र और सभी राज्यों को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ग्राम न्यायालयों की स्थापना को लेकर पूरे देश के लिए कोई स्ट्रेटजैकेट फॉर्मूला नहीं हो सकता क्योंकि स्थिति अलग-अलग राज्यों पर निर्भर करेगी। 
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