यूपी भाजपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीयत साफ है। वह राज्य की जनता को भयरहित साफ-सुथरा शासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सूत्र का कहना है कि अपराधी विकास दूबे मध्यप्रदेश. में पकड़ा गया था। उसे राज्य की पुलिस लेकर आ रही थी। रास्ते में दुर्घटना हुई, उसने भागने की कोशिश की और मुठभेड़ में मारा गया। सूत्र का कहना है कि यूपी पुलिस ने अपना पक्ष रख दिया है। वरिष्ठ नेता के अनुसार कानून व्यवस्था सही तरीके से अपना काम कर रही है। विकास दूबे अपराधी था, मारा गया और मुख्यमंत्री इस पर उठ रहे सवालों से नहीं घबड़ाते।
जवाब कम, सवाल ज्यादा है : रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि विकास दुबे मुठभेड़ कांड जवाब कम और सवाल ज्यादा छोड़ गया है। वहीं यूपी. के भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने सीधे सवालों का जवाब देने की बजाय सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। कांग्रेस, सपा के नेताओं ने जहां मोर्चा खोल दिया है, वहीं भाजपा के नेता और यूपी. सरकार के मंत्री सीधे सवाल-जवाब से बच रहे हैं।
पुलिस बेलगाम कब होती है?
इंस्टीट्यूट ऑफ कांफ्लिक्ट मैनेजमेंट के निदेशक अजय साहनी ने उठते सवाल पर कहा कि आखिर पुलिस बेलगाम कब होती है? यह जानिए। उन्होंने कहा कि देश में न्यायतंत्र में तमाम खामियां हैं। जनता का पुलिस पर बहुत भरोसा नहीं रहा। राजनेताओं का अपराधी पर संरक्षण रहता है।
ऐसे में जब पुलिस को अवसर मिलता है तो वह अपराधी को निबटा देती है? कभी कभी पुलिस की निबटाना मजबूरी भी बन जाता है। अजय साहनी का कहना है कि जिसने आठ पुलिस वालों की हत्या कराई है और उसमें शामिल रहा है, उसका तो बचना नामुमकिन है।
अब यह स्टेज इंकाऊटर कहिए या कुछ और लेकिन मुठभेड़ मान लीजिए। साहनी ने कहा कि पुलिस के हाथ में बंदूक होती है। जब उसे ऊपर से ईशारा मिलता है तो वह कभी-कभी बेलगाम भी हो जाती है। विकास दूबे के साथ मुठभेड़ की नैतिकता के सवाल पर साहनी ने कहा कि यह सब बातें आदर्श परिस्थितियों के लिए है। वैसे भी यूपी. पुलिस की गिनती प्रोफेशनल पुलिस बल में नहीं होती।