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Vice President: धनखड़ ने पैसे देकर और सुनियोजित धर्मांतरण पर जताई चिंता, कहा- जनसांख्यिकीय बदलाव पर रहें सतर्क

Sun, 02 Mar 2025 06:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।

सार

Vice President: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को भारत में पैसे देकर और सुनियोजित तरीके से हो रहे धर्मांतरण पर चिंता जताई। उन्होंने सभी से सतर्क रहने और इन प्रयासों को रोकने का आग्रह किया।
 
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उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़। - फोटो : वीडियो ग्रैब/एक्स/एएनआई
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विस्तार
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उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को भारत में पैसे देकर और सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण पर चिंता जताई। उन्होंने सभी से सतर्क रहने और इन प्रयासों को रोकने का आग्रह किया। भारतीय विचार केंद्र की ओर से आयोजित चौथे पी. परमेश्वरन स्मृति व्याख्यान में धनखड़ ने कहा कि जनसांख्यिकी में बदलाव स्वाभाविक और प्राकृतिक होना चाहिए। अगर अस्वाभाविक परिवर्तन होते हैं, तो हमें सतर्क रहना चाहिए।
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'धर्म चुनने के अधिकार से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं'
धनखड़ ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जिसमें लुभावने प्रस्ताव, प्रलोभन, जरूरतमंदों और कमजोरों तक पहुंचना, समर्थन प्रदान करना और फिर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का सुझाव देना शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की तकलीफ, मुश्किलों या जरूरतों का उपयोग धर्मांतरण के लिए करना अस्वीकार्य है। देश सभी को अपना धर्म चुनने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन अगर इस अधिकार के साथ छेड़छाड़ की जाती है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। 
 
'रोजगार, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर दबाव डालते हैं अवैध प्रवासी'
उप राष्ट्रपति ने कहा कि धर्मांतरण देश के प्रति दुर्भावना है। इसके लिए उन्होंने अवैध प्रवासियों की संख्या और उनसे पैदा होने वाले खतरों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारे रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्रों पर दबाव डालते हैं और फिर चुनावी राजनीति में एक कारक बन जाते हैं। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे संबोधित किया जाना चाहिए। 
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'चुनाव नतीजों पर दिखता है जनसांख्यिकीय बदलाव का असर' 
धनखड़ ने कहा कि इन जनसांख्यिकी बदलावों का चुनाव परिणामों पर असर पड़ता है और पिछले कुछ वर्षों में कुछ क्षेत्र इनके गढ़ बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का समाधान केवल नीतिगत दखल के जरिए से ही संभव नहीं है। ये हमारे राष्ट्रवाद और लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए खतरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश एक ऐसे मोड़ पर है, जहां ऐसे अत्यधिक अस्थिर घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे भारत की जनसांख्यिकीय पवित्रता को बनाए रखने के लिए एकजुट हों। 
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