समय के साथ-साथ अपराधी भी अपने तरीके बदल रहे हैं। ऐसे समय में साइबर और आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को भी अपना कौशल बढ़ाना होगा। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इन बातों पर जोर देते हुए बताया कि आधुनिक भारत में कैसा पुलिस बल होना चाहिए।
देश के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि एक प्रगतिशील और आधुनिक भारत में ऐसे पुलिस बल का होना बहुत आवश्यक है जो जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा करता हो। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस बल में सुधारों को लागू करने के लिए नए सिरे से जोर देने का आह्वान किया।
विज्ञापन
नायडू, पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह की किताब 'दि स्ट्रगल फॉर पुलिस रिफॉर्म्स इन इंडिया' जारी करने के बाद एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि 21वीं सदी के अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए पुलिस अधिकारियों के कौशल को बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने इस तरह की आपराधिक घटनाओं में साइबर और आर्थिक अपराधों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनमें विशेष जांच योग्यता की आवश्यकता होती है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस दौरान नायडू ने कुख्यात इमरजेंसी के दौरान पुलिस बल के दुरुपयोग की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तब पुलिस का इस्तेमान मानवाधिकारों को दबाने और राजनीतिक विरोधियों समेत हजारों लोगों को गिरफ्तार करने के लिए किया गया था।
विज्ञापन
इसके बाद 1977 में एक राष्ट्रीय पुलिस आयोग का गठन किया गया था, जिसने पुलिस सुधारों के लिए विस्तृत बहुआयामी प्रस्ताव के साथ अपनी रिपोर्ट जमा की थी।
इन मुद्दों पर युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत बताई
हालांकि, उन्होंने कहा कि निजी और संस्थागत स्तरों पर पुलिस बलों में सुधार लाने में कुछ खास प्रगति नहीं हो पाई है। नायडू ने पुलिस विभागों में रिक्त पदों पर भर्तियां और आधुनिक जरूरतों के अनुसार पुलिस इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इन्हें लेकर युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है।