उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि यह महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरक कहानियों को याद करने और फिर से सुनाने का समय है, ताकि युवा पीढ़ी को देशभक्ति, बलिदान और सेवा के गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
देश इस साल अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। देशभर में सोमवार को 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को नवनियुक्त उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देशवासियों को संदेश दिया। उन्होंने इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानियों, आधुनिक भारत के निर्माताओं को याद किया। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस इन सेनानियों को याद करने का अवसर है। उन्होंने ये भी कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता कितनी कठिनाइयों से मिली है।
विज्ञापन
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को कहा कि स्वतंत्रता दिवस उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर है जिनके साहस और बलिदान ने हमें आजादी दिलाई। ये वीर स्वतंत्रता सेनानी आधुनिक भारत के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि जैसा कि भारत पहले ही आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि यह महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरक कहानियों को याद करने और फिर से सुनाने का समय है, ताकि युवा पीढ़ी को देशभक्ति, बलिदान और सेवा के गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
76वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम पिछले 75 वर्षों में हुई अपार प्रगति का जश्न मनाते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता कितनी कठिनाई से मिली है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस उन बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने का अवसर है जिनके साहस और बलिदान ने हमें दमनकारी औपनिवेशिक शासन से आजादी दिलाई। यह दिन आधुनिक भारत के उन निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है जिनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने एक संप्रभु, स्थिर और मजबूत गणराज्य की नींव रखी।
विज्ञापन
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि आज का भारत संभावनाओं से भरा देश है। हमारा देश सर्वांगीण विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आइए इस स्वतंत्रता दिवस पर हम भारत और संवैधानिक मूल्यों के सभ्यतागत लोकाचार को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिज्ञा को फिर से दौहराएं और समावेशी, प्रगतिशील और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में खुद को समर्पित करें।