बीते बुधवार को राज्यसभा में सदन की कार्यवाही के दौरान सभापति नायडू ने जो देखा उससे वह आहत दिखाई दे रहे हैं। असल में, संसद के बजट सत्र में नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह तो सभी जानते हैं कि सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण लोकसभा और राज्यसभा टेलीविजन से होता है। परंतु कार्यवाही के दौरान सदन के कैमरे अध्यक्ष के आसन की ओर होते हैं या फिर सदन में बोल रहे सदस्य की ओर।
इस स्थिति में सदन में नारेबाजी, हंगामा या बैनर दिखाने वाले सदस्यों पर कैमरे को फोकस नहीं किया जाता। ऐसे में अपने हंगामे को जनता तक पहुंचाने के लिए सांसदों ने मोबाइल से वीडियोग्राफी करना शुरू कर दिया है। वह अपने साथी सांसदों से सदन में नारे लगाते हुए वीडियो बनवा लेते हैं और फिर बाद में मीडिया को जारी कर देते हैं।
इस सत्र में ऐसी मोबाइल वीडियोग्राफी की शुरुआत लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने की थी। सभापति वेंकैया नायडू ने इसे लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की और चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधि के खिलाफ संसद के विशेषाधिकार हनन और सदन के अपमान का मामला बन सकता है।
यह है नियम
सांसदों को फोन और टेबलेट लाने की अनुमति है, लेकिन उन्हें फोन बंद रखना होता है। मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाने की अनुमति भी नहीं है।