धनखड़ मशहूर शिक्षाविद, समाजसेवी और उद्योगपति डॉ. एमएस रमैया के जन्मशती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अपील गैर दलीय है और उसका राजनीति में संबंधित पक्षों से नहीं, बल्कि राष्ट्र के कल्याण से संबंध है।
संसदीय व्यवधान पर दुख जताते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को लोगों खासकर युवाओं से ‘लोकतंत्र के मंदिर’ में ऐसे आचरण के विरुद्ध माहौल एवं जनमत तैयार करने के लिए जन आंदोलन चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, संसद में हम यह सुनिश्चित करते हैं कि देश का भविष्य सही मार्ग पर हो। इसके लिए हमें अपने आचरण से ऐसी मिसाल कायम करनी होगी जिसे सभी अपने व्यवहार में उतार सके।
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धनखड़ मशहूर शिक्षाविद, समाजसेवी और उद्योगपति डॉ. एमएस रमैया के जन्मशती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अपील गैर दलीय है और उसका राजनीति में संबंधित पक्षों से नहीं, बल्कि राष्ट्र के कल्याण से संबंध है। धनखड़ ने कहा, डॉ. आंबेडकर की हमारे संविधान का मसौदा तैयार करने में अहम भूमिका थी। संविधान सभा में तीन सालों तक उस पर बहस हुई, चर्चा-परिचर्चा एवं संवाद हुआ। उनके सामने एक मुश्किल भरा काम था, कई विवादास्पद मुद्दे थे, भिन्न-भिन्न राय थी, साझी राय पर पहुंचना मुश्किल था। इन सब बातों के बावजूद संविधान सभा में एक भी व्यवधान नहीं हुआ। कोई आसन के सामने नहीं आया, किसी ने नारेबाजी नहीं की, किसी ने तख्तियां नहीं दिखाईं। उपराष्ट्रपति ने कहा, जिन्होंने हमें संविधान दिया, उनकी ओर से देशहित में जब इतना बड़ा काम किया जा सकता तो फिर, इस बात में क्या कठिनाई है कि हम उन जैसा आचरण नहीं कर पाते हैं। हमें ऐसा करना चाहिए।
राज्यसभा सत्र के हर मिनट पर करोड़ों होता है खर्च :
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के तौर पर वह जो कुछ देखते हैं, वह सभी के लिए चिंता का विषय है क्योंकि राज्य सभा के सत्र के हर मिनट पर करोड़ों रुपये का सरकारी धन व्यय होता है। उन्होंने कहा, राज्यसभा सरकार, कार्यपालिका को जवाबदेह ठहराने का मंच है लेकिन वहां व्यवधान होता है, सबसे अधिक चिंता की जो बात है, वह यह है कि आपको उसकी कोई परवाह नहीं है।