उपराष्ट्रपति वेकैंया नायडू(फाइल फोटो)
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि कोरोना को देखते हुए लगाया गया लॉकडाउन 3.0 असल में हमारी परीक्षा है जिसे हमें पास करना ही होगा। उन्होंने कहा, सरकार ने मौजूदा हालातों को देखते हुए आर्थिक गतिविधियों को चरणवार बहाल करने की जरूरत को देखते हुए कुछ रियायतें दी हैं। आने वाले वक्त में कोरोना से लड़ाई में ये रियायतें मील का पत्थर साबित होंगी।
नायडू ने कहा, इन रियायतों के साथ लॉकडाउन 3.0 की सफलता अब सिर्फ सरकार की कोशिशों से आगे बढ़कर तमाम हिस्सेदारों की सहभागिता पर निर्भर करेगी। इसमें जनता, राज्य सरकारें, संबंधित एजेंसियां, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान आदि सबको अपनी भूमिका निभानी होगी। ये दो हफ्ते हमारी असल परीक्षा के हैं। जिसे एक देश के तौर पर हमें पास करना ही होगा। मेरे पास ऐसा भरोसा करने का एक कारण यह भी है कि इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है।
नायडू ने कहा, इस दौरान हमारा आचरण और संयम ही कोरोना से जंग में आगे की रणनीति की रूपरेखा तय करेगा। एक देश के नाते हमें इस परीक्षा को डिस्टिंकशन के साथ पास करना है। इन दो हफ्तों में तय होगा कि पहले जैसे हालात वापस आने में कितना वक्त लगेगा।
- भारत कोरोना से मोर्चे में आगे
नायडू ने कहा, कोरोना के खिलाफ मोर्चे में भारत ने अहम भूमिका निभाई है और वह आगे रहा है। अब तीसरे लॉकडाउन में भी हमें इसे आगे ले जाना होगा। अब तक सरकार इस लड़ाई में आगे थी। अब जनता और राज्य सरकारों की बारी है।
जीवन और आजीविका के बीच साधना होगा संतुलन
नायडू ने कहा, लॉकडाउन 3.0 में हमें जीवन और आजीविका के बीच संतुलन साधना होगा। आर्थिक गतिविधियां शुरू हाेंगी, जिंदगी पटरी पर लौटेगी साथ ही सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। एहतियात बरतते हुए कामकाज शुरू करना होगा ताकि जान भी रहे और जहान भी।