इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने राज्यसभा के अध्यक्ष को बुधवार को पत्र लिखकर मीडिया में आए बयान को गलत बताते हुए उसे संज्ञान में न लेने की अपील की है। उन्होंने लिखा है कि विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का पूरा मार्गदर्शन और सहयोग मिल रहा है। इस बीच मीडिया में कुछ आया है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस बयान को संज्ञान में न लिया जाए। स्मृति ईरानी तथा अन्य किसी अफसर की ओर से विश्वविद्यालय के कार्य में कभी भी हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी तथा मंत्रालय की ओर से ऑफलाइन के मुद्दे पर दबाव बनाए जाने के बयान से पीछे हट गए हैं। उनका कहना है कि बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। बुधवार को मीडिया से उन्होंने इतना जरूर कहा कि स्थानीय नेताओं की ओर से बेवजह दबाव बनाया जा रहा है। इसमें भाजपा, सपा और कांग्र्रेस के अलावा संघ के लोग भी शामिल हैं। इस स्थिति में काम करना कठिन होगा।
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ऑफलाइन के मुद्दे पर मंत्रालय के पत्र को लेकर कुलपति काफी नाराज रहे। मंगलवार को उन्होंने बयान दिया था कि मंत्रालय चाहे तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि इसी तरह से हस्तक्षेप करना है तो एमपी, एमएलए को ही कुलपति बना दें। इस बयान पर चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद कुलपति बयान से पलट गए। उनका कहना है कि मंत्री और मंत्रालय की ओर से दबाव बनाए जाने का बयान उन्होंने नहीं दिया है। उनका यह कहना है कि स्मृति ईरानी और मंत्रालय की ओर से उन पर किसी तरह का दबाव भी नहीं डाला गया। हालांकि, स्थानीय नेता तथा सांसद, विधायक उनके निशाने पर बुधवार को भी रहे। कुलपति ने कहा कि आखिर सभी दल के नेता सांसद, विधायक छात्रों के साथ क्यों गए। उनका कहना है कि इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा तो काम करना कठिन होगा।
कुलपति के समर्थन में आए इविवि और कॉलेज के शिक्षक
ऑफलाइन के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप पर कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के बयान के समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों के शिक्षक भी आ गए हैं। अलग-अलग बैठकों में शिक्षकों ने कुलपति के फैसलों का समर्थन करने के साथ ऑफलाइन के मुद्दे पर नेताओं के हस्तक्षेप की कड़े शब्दों में निंदा की। शिक्षकों ने इसे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का अतिक्रमण बताया।
विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (आटा) की बैठक में शिक्षकों का कहना था कि सांसद, विधायक या किसी अन्य को उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सदस्य इस तरह के हस्तक्षेप का विरोध करते हैं। बैठक में कुलपति पद की गरिमा का हनन करने वाले नकारात्मक प्रयासों की निंदा का प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों से भी रचनात्मक योगदान की अपील की। बैठक में उपाध्यक्ष डॉ.लालसा यादव, महामंत्री प्रोफेसर शिव मोहन प्रसाद आदि मौजूद रहे।
संघटक कालेज शिक्षक संघ की बैठक में कुलपति के फैसलों का स्वागत किया गया। उनका कहना था कि चार महीने में कुलपति ने विश्वविद्यालय और कालेजों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि कुलपति को तनावमुक्त माहौल में काम करने का मौका दिया जाए। शिक्षकों ने सरकार से भी अपील की कि विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप से बचें। बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए शिक्षकों ने जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने की भी घोषणा की। बैठक में कुलपति और शिक्षकों के साथ हुए दुर्व्यवहार की भी निंदा की गई।
बैठक में अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा, महासचिव डॉ.उमेश प्रताप सिंह, डॉ.रेखारानी, डॉ.धीरेंद्र द्विवेदी, डॉ.राजेश कुमार गर्ग आदि मौजूद रहे। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने भी प्रोफेसर हांगलू के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक दखलांदजी बंद होनी चाहिए। यह संस्थान की स्वायत्तता के लिए जरूरी है। लैपटाप बांटने वाले और डिजिटल इंडिया की बात करने वाले ही ऑनलाइन परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। शिक्षक प्रोफेसर हांगलू का पूरा समर्थन करते हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति पर परिसर का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। ऋचा ने कुलपति को छुट्टी पर भेजकर उनके कार्यकाल में हुए फैसलों तथा नियुक्तियों की जांच की मांग की है।
ऋचा का कहना है कि ऑफलाइन के मुद्दे पर छात्रों ने एकजुट होकर संघर्ष किया, लेकिन कुलपति इसका राजनीतिकरण करके नियुक्ति में अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी आदि मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं।
विवादित बयानों पर नाराजगी जताते हुए एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भी बुधवार को कुलपति का पुतला दहन किया। छात्रसंघ भवन पर जुटे छात्रों और कार्यकर्ताओं का कहना था कि कुलपति राष्ट्रवादी संगठनों को निशाना बनाना बंद करें। पुतला दहन करने वालों में छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, सूर्य प्रकाश मिश्र, ज्ञान शुक्ला, श्याम प्रकाश पांडेय आदि शामिल रहे।