राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट के जरिए भारतीयता का संदेश देने की प्रधानमंत्री की इच्छा के लिए सरकार को लंबी माथापच्ची करनी पड़ सकती है। दरअसल मंदिर आंदोलन की अगुआ विहिप की मांग है कि ट्रस्ट में न तो सरकार का कोई प्रतिनिधित्व हो और न ही वैष्णव, शैव और सगुण ब्रह्म को मानने वालों के अलावा किसी अन्य मतावलंबियों को जगह मिले। पूजा पद्धति को परिवारवाद से बचाने के लिए विहिप ने बद्रीनाथ मॉडल अपनाए जाने की वकालत की है, जहां ब्रह्मचारी रहने तक ही पुजारी पद पर रह सकता है।
राय ने कहा कि विहिप सरकार से मंदिर के लिए राम जन्मभूमि न्यास द्वारा तैयार सामग्री और मॉडल स्वीकार करने का अनुरोध करेगी। विहिप के पास मंदिर के पहले मंजिल के निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध है। इससे तुरंत कार्य शुरू कराने में सुविधा होगी।