विश्व हिंदू परिषद ने हिंदुओं को जाति के नाम पर बंटने पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि हिंदुओं को कमजोर करने के लिए यह दूसरे धर्मों के लोगों और भारत विरोधी विदेशी ताकतों की सोची समझी साजिश है। हिंदू समाज को इन खतरों को समझना चाहिए और जातियों के नाम पर बंटने की बजाय एक होकर रहना चाहिेए।
प्रयागराज में आयोजित कुंभ में एक बैठक कर विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले पर चिंता जताई। संगठन ने कहा है कि भारत के ही अंदर सामने आए क्षेत्रवाद से भी हिंदू कमजोर होते हैं और एक समाज के रुप में अपनी बात नहीं रख पाते।
अगर वे एक साथ रहते तो उनके किसी हितों के खिलाफ सोचने की किसी में हिम्मत न होती। लेकिन उनके जातियों में बंटने से उन्हें आपस में लड़ाने और राजनीतिक हित साधने वाले सामने आ जाते हैं। विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति और प्रन्यासी मंडल ने बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की।
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि हिंदू समाज हमेशा हर जाति के लोगों का सम्मान करने वाला रहा है। किसी भी जाति में पैदा हुए विद्वान को समाज ने हमेशा आदर दिया है और उन्हें पूजा है। ऐेसे में इसे एक दुष्प्रचार ही कहा जा सकता है कि हिंदुओं के बीच जातिवाद था और एक समाज दूसरे से किसी तरह बैर रखता था।
बंसल के मुताबिक इस कुंभ के दौरान ही तथाकथित निम्न जाति में पैदा हुए कुछ लोगों को हिंदुओं के बीच अतिसम्मानित धार्मिक ओहदे महामंडलेश्वर से नवाजा गया है। यह हिंदू समाज की सहिष्णुता है जो सबको एक साथ लेकर चलती है। उन्होंने सभी को इन उदाहरणों को देखकर एक सबक लेने और आपस में न बंटने की अपील की।