दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। शुक्रवार को पार्टी के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि कुछ दूसरे राजनीतिक दल चाहते थे कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोटों का बंटवारा न हो, इसलिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को दिल्ली में मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।
गोपाल राय ने कहा कि कांग्रेस को आज की जमीनी हालत का पता नहीं है और वह अपने घमंड में जी रही है। शीला दीक्षित के बयान का जिस तरह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बचाव किया और आप के साथ गठबंधन की संभावना के खिलाफ बयान दिया, उसके बाद से ही पार्टी ने यह तय कर लिया कि अब कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होना चाहिए।
आप पार्टी कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन करने की संभावनाओं पर काम कर रही थी। उसके कई शीर्ष नेता कांग्रेस के संपर्क में बताए जा रहे थे। यही कारण है कि इस बीच आप कांग्रेस पर कोई प्रतिक्रिया देने में सावधानी बरत रही थी।
इसका नजारा तब लोगों के सामने आ गया था, जब दिल्ली विधानसभा में सिखों पर हुए हमलों में राजीव गांधी के नाम सेे प्रस्ताव आ गया था। बाद में पार्टी ने यह कहकर मामला संभालने की कोशिश की थी कि मूल प्रस्ताव में राजीव गांधी का नाम नहीं था और एक विधायक ने हाथ से लिखकर इसे शामिल कर दिया था (जो कि अवैध था)।