कई राज्यों ने थक हार कर आयुर्वेद को अपनाना शुरू कर दिया। अहमदाबाद में पुलिस प्रशासन ने राजस्थान के चुरु शहर से कोविड-19 संक्रमण से निपटने के लिए काढ़ा मंगवाया तो भीलवाड़ा के जिलाधिकारी और राजस्थान सरकार ने भी इसी तरह की पहल शुरू कर दी है।
डा. जेएलएन शास्त्री ने जानकारी दी कि 20 हजार 55 घंटे काम करके डा. भूषण पटवर्धन समेत अन्य के साथ गाइड लाइन तैयार कर ली गई है। आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड-19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका है।
श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया है। इसकी राजस्थान और गुजरात के अहमदाबाद में काफी मांग है। चुरु जिले के गांधी विद्या मंदिर, सरदार शहर में स्थित इस रसायनशाला के चूर्ण को राजस्थान आयुर्वेद की मान्यता प्राप्त है।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रसायनशाला के अधिकारी इस चूर्ण को हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक बता रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई राज्य में इस तरह का अलग-अलग प्रयोग चल रहा है।
डा. जेएलएन शास्त्री ने कहा कि कुछ राज्य इसे दवा के रुप में अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और आयुष पद्धति के विशेषज्ञों, आईसीएमआर तथा सीएसआर की निगरानी में अब इसके प्रमाणिक ईलाज पर मुहर लगने जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि आईसीएमआर के सहयोग से आयुष विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग कोविड-19 के संक्रमितों पर किया है। इसके बहुत उत्साहजनक नतीजे आए हैं। इसके बाद आईसीएमआर ने भी इस पर अपनी मुहर लगाई है।
माना जा रहा है कि इस ईलाज के कारगर रूप में सामने आने के बाद आप पूरी दुनिया में आयुष पद्धति का डंका बज सकता है। डा. जेएलएन शास्त्री कहते हैं कि कुछ घंटे इंतजार कीजिए। आपको खुद काफी कुछ पता चल जाएगा।
महरौली स्थिति प्रचीन शक्तियोग पीठ मंदिर के प्रमुख रामजीदास (रसायनी बाबा) खुद भस्म, रसायन, अवलेह, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के मर्मज्ञ है। रसायनी बाबा का कहना है कि जीवाणु, विषाणु या किसी भी कीट से होने वाले रोग को लेकर आयुर्वेद में काफी कारगर उपाय हैं।
आयुष पद्धति से गंभीर से गंभीर रोगों का ईलाज किया जा सकता है। रसायनी बाबा का कहना है कि देश आईएएस अफसर चलाते हैं। जो अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान पद्धति पर ही भरोसा करते हैं। इसलिए इन्हें आयुष के महत्व की जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को इस ओर पहले ध्यान देना चाहिए था।