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जल्द ही कोविड-19 संक्रमण का आयुर्वेद से होगा उपचार, नतीजों पर आईसीएमआर ने भी लगाई मुहर!

Wed, 06 May 2020 12:46 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड-19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार
  • चुरु जिले की श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया
  • चूर्ण हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक
  • पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में भी अब आयुर्वेदिक काढ़े की मांग
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Ayurveda Coronavirus - फोटो : AmarUjala (सांकेतिक)
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विस्तार
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कई राज्यों ने थक हार कर आयुर्वेद को अपनाना शुरू कर दिया। अहमदाबाद में पुलिस प्रशासन ने राजस्थान के चुरु शहर से कोविड-19 संक्रमण से निपटने के लिए काढ़ा मंगवाया तो भीलवाड़ा के जिलाधिकारी और राजस्थान सरकार ने भी इसी तरह की पहल शुरू कर दी है।

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पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में भी अब आयुर्वेदिक काढ़े का जोर चल निकला है। देर से ही सही केंद्र सरकार भी इस रास्ते पर आई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय की पहल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए दो अप्रैल को डा. जेएलएन शास्त्री के नेतृत्व एक टास्क फोर्स का गठन किया था।

टास्क फोर्स अब इसके पक्ष में है कि कोविड-19 संक्रमण का ईलाज आयुर्वेद की पद्धति से किया जाए।

सकारात्मक नतीजे आने की उम्मीद

डा. जेएलएन शास्त्री ने जानकारी दी कि 20 हजार 55 घंटे काम करके डा. भूषण पटवर्धन समेत अन्य के साथ गाइड लाइन तैयार कर ली गई है। आयुर्वेदिक पद्धति से कोविड-19 के संक्रमण का ईलाज करने का प्रोटोकॉल भी तैयार हो चुका है।

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डा. शास्त्री बताते हैं कि इसमें आईसीएमआर, सीएसआर जैसी भारत सरकार की संस्था शामिल है। डा. शास्त्री इसको लेकर हुए विलंब के सवाल पर कहते हैं कि पहले तो आयुर्वेद या आयुष पद्धति से ही छुआछूत किया जा रहा था।

लोग इसे कोविड-19 के संक्रमण के ईलाज से बाहर रख रहे थे। सरकार ने ही टास्क फोर्स बनाने में देर की। दो अप्रैल को इसके बारे में निर्णय लिया गया, इसके बाद युद्ध स्तर पर काम हुआ है। उनका दावा है कि आयुष पद्धति में कोविड-19 संक्रमण का कारगर ईलाज है। इसके प्रयोग से जल्द ही देश में सकारात्मक नतीजे में आएंगे।

सर्व ज्वरहर चूर्ण की अहमदाबाद को भी है जरूरत

श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया है। इसकी राजस्थान और गुजरात के अहमदाबाद में काफी मांग है। चुरु जिले के गांधी विद्या मंदिर, सरदार शहर में स्थित इस रसायनशाला के चूर्ण को राजस्थान आयुर्वेद की मान्यता प्राप्त है।

उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रसायनशाला के अधिकारी इस चूर्ण को हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक बता रहे हैं। आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई राज्य में इस तरह का अलग-अलग प्रयोग चल रहा है।

डा. जेएलएन शास्त्री ने कहा कि कुछ राज्य इसे दवा के रुप में अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और आयुष पद्धति के विशेषज्ञों, आईसीएमआर तथा सीएसआर की निगरानी में अब इसके प्रमाणिक ईलाज पर मुहर लगने जा रही है।

प्रयोग के बाद तैयार हो रहा है ईलाज में आयुर्वेद का प्रयोग

सूत्र बताते हैं कि आईसीएमआर के सहयोग से आयुष विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग कोविड-19 के संक्रमितों पर किया है। इसके बहुत उत्साहजनक नतीजे आए हैं। इसके बाद आईसीएमआर ने भी इस पर अपनी मुहर लगाई है।

माना जा रहा है कि इस ईलाज के कारगर रूप में सामने आने के बाद आप पूरी दुनिया में आयुष पद्धति का डंका बज सकता है। डा. जेएलएन शास्त्री कहते हैं कि कुछ घंटे इंतजार कीजिए। आपको खुद काफी कुछ पता चल जाएगा।

सरकार के आईएएस अफसर क्या जानें आयुर्वेद का महत्व : रसायनी बाबा

महरौली स्थिति प्रचीन शक्तियोग पीठ मंदिर के प्रमुख रामजीदास (रसायनी बाबा) खुद भस्म, रसायन, अवलेह, आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के मर्मज्ञ है। रसायनी बाबा का कहना है कि जीवाणु, विषाणु या किसी भी कीट से होने वाले रोग को लेकर आयुर्वेद में काफी कारगर उपाय हैं।

आयुष पद्धति से गंभीर से गंभीर रोगों का ईलाज किया जा सकता है। रसायनी बाबा का कहना है कि देश आईएएस अफसर चलाते हैं। जो अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान पद्धति पर ही भरोसा करते हैं। इसलिए इन्हें आयुष के महत्व की जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार को इस ओर पहले ध्यान देना चाहिए था। 

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