जीनोम-सीक्वेंसिंग विश्लेषण के आधार पर भारतीय सार्स कोव-2 (SARS-COV-2) जीनोमिक्स कंसोर्टिया इंसाकॉग (INSACOG) ने कहा है कि देश में कोरोना वायरस के बहुत कम रीकॉम्बिनेंट वैरिएंट पाए गए हैं और इनमें से किसी ने भी स्थानीय रूप से या बढ़ा हुआ संक्रमण नहीं दिखाया है। न ही गंभीर बीमारी का कोई मामला सामने आया है जिसमें मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ हो।
अब तक कुल 2,40,570 नमूनों की सीक्वेसिंग
इंसकॉग ने बुधवार को जारी 11 अप्रैल के अपने साप्ताहिक बुलेटिन में कहा कि संदिग्ध रीकॉम्बिनेंट की घटनाओं और संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य मामलों की बारीकी से निगरानी की जा रही है। इसने कहा कि अब तक कुल 2,40,570 नमूनों की सीक्वेसिंग की गई है। जीनोम सीक्वेंसिंग विश्लेषण के आधार पर भारत में बहुत कम रिकॉम्बिनेंट वैरिएंट मिले हैं।
वैश्विक परिदृश्य पर इंसाकॉग ने कहा कि दो रिकॉम्बिनेंट वैरिएंट -एक्सडी और एक्सई (XD और XE) की दुनिया भर में बारीकी से निगरानी की जा रही है। एक्सडी में एक डेल्टा जीनोम शामिल है और यह एक ओमिक्रॉन एस जीन है। यह मुख्य रूप से फ्रांस में मिलता है। एक्सई एक बीए.1/बीए.2 (BA.1/BA.2) रीकॉम्बिनेंट है, जिसमें बीए. 2 से संबंधित एस जीन सहित अधिकांश जीनोम हैं। एक्सई थोड़ा अधिक संक्रमण दर दिखाता है। एक्सई भी बीए.2 के अधिक संक्रमण दर दिखाता है। हालांकि, इस खोज के लिए और पुष्टि की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि महाराष्ट्र में एक्सके/एक्सएम का एक मामला पाया गया, राजस्थान में एक्सजे का एक मामला और देश में ओमिक्रॉन के एक्सजे और एक्सई रीकॉम्बिनेंट में से प्रत्येक का एक मामला पाया गया है।