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Who Is Nimisha Priya: निमिषा को फांसी से बचाने की गुहार, वेणुगोपाल का PM को पत्र; जानें टाइमलाइन समेत सबकुछ

Sat, 12 Jul 2025 06:38 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर नर्स की फांसी पर रोक लगवाने के लिए हर संभव कूटनीतिक और मानवीय जरिया अपनाने का आग्रह किया था।
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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को केरल में जन्मी निमिषा प्रिया को यमन में फांसी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की। 'एक्स' पर एक पोस्ट में वेणुगोपाल ने कहा कि प्रिया विदेशी धरती पर अकल्पनीय क्रूरता और घरेलू दुर्व्यवहार की शिकार हैं। 

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कांग्रेस महासचिव (संगठन) ने अपने पोस्ट में कहा, 'निमिषा प्रिया को मौत की सजा अन्याय है। यह न्याय का घोर उपहास है। वह विदेशी धरती पर अकल्पनीय क्रूरता और घरेलू दुर्व्यवहार की शिकार है, जिसे मौत के कगार पर धकेल दिया गया है।' उन्होंने आगे कहा, 'मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निमिषा की फांसी रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।' 

16 जुलाई को यमन में फांसी दी जानी है
केरल की इस नर्स को 16 जुलाई को यमन में फांसी दी जानी है। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में वेणुगोपाल ने कहा, 'हालांकि, एक्शन काउंसिल और उसके परिवार ने पीड़िता के परिवार से 'रक्त-धन' (दियाह) स्वीकार करने के लिए बातचीत करने के प्रयास किए हैं, जिससे उसकी जान बच सकती है, लेकिन चल रहे गृहयुद्ध और अन्य आंतरिक अशांति के कारण इन वार्ताओं को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।'
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'मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए'
उन्होंने प्रधानमंत्री से नर्स को मौत की सजा से बचाने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ सभी संभव राजनयिक उपाय अपनाने की मांग की। उन्होंने अपील की कि मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और हरसंभव हस्तक्षेप किया जाए।

क्या है मामला?
केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोडे की रहने वाली निमिषा प्रिया को जुलाई 2017 में अपने यमनी व्यापारिक साझेदार की हत्या के लिए 2020 में दोषी ठहराया गया था। पिछले नवंबर में यमन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने उनकी अपील खारिज कर दी थी। प्रिया फिलहाल सना केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
 
तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज
इस फैसले के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर नर्स की फांसी पर रोक लगवाने के लिए हर संभव कूटनीतिक और मानवीय जरिया अपनाने का आग्रह किया था।

2008 में यमन गईं थी निमिषा
केरल के पलक्कड़ जिले के कोलेंगोडे की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया 2008 में अपने माता-पिता की मदद से यमन गईं थी। यहां उन्होंने कई अस्पतालों में काम किया। इसके बाद 2011 में वे भारत लौटीं और केरल के टॉमी थॉमस से शादी की। इसके बाद 2012 में पति-पत्नी वापस यमन चले गए। यमन की राजधानी सना में निमिषा ने फिर से नर्स का काम शुरू कर दिया। निमिषा एक बेटी को भी जन्म दिया। 2014 में आर्थिक तंगी हुई तो निमिषा के पति बेटी को लेकर वापस केरल आ गए। इसी वक्त यमन में गृह युद्ध शुरू हो गया और वीजा मिलने पर रोक लग गई। इसके चलते निमिषा के पति वापस यमन नहीं जा सके। 

2015 में शुरू किया क्लीनिक
नर्स निमिषा प्रिया यमन में अपना क्लीनिक खोलना चाहती थीं। यमन के नियमों के मुताबिक वहां कोई भी व्यवसाय शुरू करने के लिए स्थानीय लोगों के साथ साझेदारी जरूरी है। इसलिए 2014 में निमिषा यमन के नागरिक तलाल अब्दो माहदी के संपर्क में आईं। इसके बाद 2015 में निमिषा ने माहदी के साथ साझेदारी में क्लीनिक खोला।

क्लीनिक खोलने के कुछ समय बाद 2015 में निमिषा एक महीने के लिए केरल आई। निमिषा के माहदी भी आया था। इस दौरान माहदी ने उसके घर से निमिषा की शादी की तस्वीर चुरा ली। इस तस्वीर में छेड़छाड़ करके माहदी ने खुद के निमिषा का पति होने का दावा किया। साथ ही उसने क्लीनिक के दस्तावेजों में भी हेराफेरी की। वह निमिषा को अपनी पत्नी बताकर उसकी मासिक आय से पैसे भी लेने लगा।

प्रताड़ित करता था, पासपोर्ट जब्त कर लिया था
माहदी निमिषा को प्रताड़ित करता था। निमिषा ने आरोप लगाया था कि माहदी उसे और उसके परिवार को परेशान करने लगा। उसने निमिषा का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया था। वह चाहता था कि निमिषा यमन छोड़कर न जाए। उसने कई बार निमिषा को धमकाया भी था। माहदी ने उससे क्लीनिक सारे पैसे और गहने भी ले लिए। निमिषा की मां ने आरोप लगाया कि एक बार निमिषा ने सना पुलिस ने शिकायत की तो पुलिस ने माहदी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उल्टा निमिषा को ही गिरफ्तार कर लिया। उसे छह दिन के लिए जेल में डाल दिया। 

पासपोर्ट पाने के लिए लगाया था बेहोशी का इंजेक्शन
निमिषा की मां प्रेमा कुमारी ने बताया कि जब निमिषा जेल से छूटी तो उसे एक जेल वार्डन ने बताया कि वह माहदी को बेहोशी का इंजेक्शन लगा दे और अपना पासपोर्ट लेकर चली जाए। निमिषा ने वैसा ही किया। मगर माहदी नशे का आदी था, इसलिए उस पर इंजेक्शन का असर नहीं हुआ। इसके बाद निमिषा ने उसको ज्यादा दवा दे दी। दवा के ओवरडोज से माहदी की मौत हो गई। इसके बाद यमन से भागने की कोशिश करते समय निमिषा को गिरफ्तार किया गया।

2018 में उसे हत्या का दोषी ठहराया गया। 2020 में सना की एक ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई। यमन की सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में फैसले को बरकरार रखा, लेकिन ब्लड मनी का विकल्प खुला रखा। ब्लड मनी पीड़ित के परिवार द्वारा तय किया जाने वाला मुआवजा है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ यमन के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 2023 में उनकी अपील खारिज कर दी गई। अब निमिषा की सजा को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है।

अप्रैल 2024 में मां ने की थी मुलाकात
पिछले साल अप्रैल में निमिषा की मां प्रेमा कुमारी ने उनसे यमन की जेल में मुलाकात की थी। जेल से लौटीं निमिषा प्रिया की मां प्रेमा कुमारी ने एक वीडियो के जरिये अपनी भावना बयां करते हुए भारत और यमन सरकार को शुक्रिया भी कहा था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी सरकार की दयालुता के कारण ठीक है। जब वह जेल में गईं, तो उनकी बेटी उन्हें दूर से देखते ही दौड़ लगाकर आई और गले लगा लिया। वह रोते-रोते मुझे मम्मी कहकर पुकार रही थी। निमिषा की मां वे कई साल से अपनी बेटी से मिलने के लिए प्रयास कर रहीं थी। दिसंबर 2023 में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यमन जाने  की अनुमति मांगी थी, ताकि वे अपनी बेटी की मौत की सजा माफ करवा सकें। अनुमति मिलने के बाद वह भारत से यमन गईं थीं। उन्होंने ब्लड मनी के लिए भी काफी बातचीत की थी।

ब्लड मनी देकर मिल सकती है माफी
प्रिया के लिए मौत की सजा से बचने का एकमात्र तरीका मृतक के परिवार से यमन कानून के अनुसार उन्हें ब्लड मनी यानी खून की रकम देकर क्षमा प्राप्त करना है। अरब देशों में लागू इस्लामिक कानून के मुताबिक पीड़ित और उसका परिवार तय करते हैं कि अपराधी को क्या सजा दी जाए? मगर हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को यह हक है कि वे हत्या अभियुक्त को पैसे लेकर माफ कर सकते हैं। इसे ब्लड मनी कहा जाता है। यह एक तरह का मुआवजा होता है। इसके लिए कोई रकम तय नहीं होती है। यह पीड़ित और अपराधी के परिजनों की सहमति से तय होता है।

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