राज्यसभा के कई सांसदों का कार्यकाल आज खत्म हो रहा है। अपना कार्यकाल पूरा कर चुके सांसदों ने राज्यसभा में विदाई भाषण भी दिया। इस मौके पर सभी ने अपने कार्यकाल से जुड़े अनुभवों को साझा किया।
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का विदाई भाषण चर्चा का केंद्र रहा। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि 'राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू मुझे काफी 'किलो' से जानते हैं, मेरे वजन को लेकर कई नेता चिंतित रहते हैं लेकिन मुझे लगता है कि राजनीति में आपका ज्यादा वजन होना चाहिए।'
चौधरी की इस बात पर नायडू ने भी जवाब दिया। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि 'निश्चित तौर पर आपको अपना वजन घटाना चाहिए और अपनी पार्टी का वजन बढ़ाना चाहिए।'
नायडू के इतना कहते ही पूरा सदन सांसदों की हंसी और ठहाकों से गूंज उठा।
बता दें कि रेणुका चौधरी हाल ही में अपनी हंसी को लेकर चर्चा में थीं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब दे रहे थे। उसी दौरान पीएम अपने भाषण में कांग्रेस के उस दावे का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें कांग्रेस आधार को अपना बताती है। इसके जवाब के क्रम में प्रधानमंत्री ने सदन में कहा था कि सात जुलाई 1998 को वर्तमान सभापति वेंकैया नायडू ने बतौर राज्यसभा सदस्य तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से सवाल पूछा था।
नायडू के सवाल के जवाब में आडवाणी ने कहा कि बहुउद्देश्यीय राष्ट्रीय कार्ड का उपयोग पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश, जीवन बीमा, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार, जमीन के दस्तावेज, शहरी संपत्तियों आदि में किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आधार का बीज यहां है...20 साल पहले। प्रधानमंत्री के आधार पर दिए इसी बयान पर कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी की क्या मजाक है, का आभास कराती हुई सदन में हंसी के ठहाके गूंजे। उनकी इस हंसी पर पीएम ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने रामायण के बाद ऐसी हंसी सुनी है।
जिसके बाद रेणुका ने पीएम की इस टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे महिलाओं के खिलाफ बताया।