राज्यसभा के अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू
राज्यसभा के अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने बुधवार को बागी जदयू सांसद शरद यादव और अली अनवर को अयोग्य करार देने के अपने फैसले की आलोचना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी न्याय न मिलने के समान है और ऐसे मामलों को लंबित नहीं छोड़ना चाहिए।
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 12 वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने आयुक्तों से भी इसी तरह से काम करने और लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए ‘ईमानदारी से प्रयास’ करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि मंगलवार को मैंने तीन महीने के भीतर अयोग्यता पर एक आदेश पारित किया और एक मजबूत राय रखी कि ऐसे निर्णय तीन महीने के भीतर ही हो जाने चाहिए क्योंकि इनमें से कुछ याचिकाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। मैं समझता हूं कि मेरे फैसले का देश भर के लोगों द्वारा स्वागत किया जाएगा।
इस फैसले को लेकर आलोचकों को जवाब देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि बेशक, लोग इसका स्वागत कर रहे हैं लेकिन कुछ यह भी पूछ रहे हैं कि अध्यक्ष ने महज तीन महीने के भीतर उक्त आदेश क्यों दिया। वेंकैया ने कहा कि न्याय में देरी इंसाफ न मिलने के समान है। उन्होंने सूचना आयुक्तों से नागरिकों को ‘समय पर और सही जानकारी’ देने की बात भी कही।