लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक तजुर्बे के धनी एम वेंकैया नायडू के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष की बहुमत वाली राज्यसभा में संतुलन बनाए रखने की होगी। बतौर सभापति नायडू को राज्यसभा के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
नायडू मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्री रह चुके हैं जहां उन्होंने स्मार्ट सिटी योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। राज्यसभा में इन योजनाओं से जुड़े विकास पर विपक्ष को वह सवाल करने का कितना मौका देते हैं, यह देखना होगा। आगामी शीतकालीन सत्र से नायडू राज्यसभा के संचालन की जिम्मेदारी निभाएंगे।
10 अगस्त को उप राष्ट्रपति पद की कुर्सी संभालने के एक दिन बाद ही संसद का मानसून सत्र समाप्त हो जाएगा। लेकिन शीतकालीन सत्र में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कमीशन संशोधन जैसे संवेदनशील विधेयकों के मामले में वेंकैया की भूमिका अहम रहेगी। एनडीए के अल्पमत में होने की वजह से पिछले तीन साल में मोदी सरकार को कई बार किरकिरी का सामना करना पड़ा है।
दो बार तो राष्ट्रपति के अभिभाषण में संशोधन प्रस्ताव को मंजूर करवाया गया। हालांकि जीएसटी और सीधे जनता से जुड़ी विधेयकों पर राज्यसभा में सरकार को विपक्ष का साथ जरूर मिला। लेकिन राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष ने अपनी ताकत दिखाकर सरकार को खासा परेशान किया।
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि सरकार अपने कार्यकाल केअंतिम साल में कई संवेदनशील विधेयकों को पास कराने की कोशिश करेगी। 2018 के मध्य से उच्च सदन में भाजपा की स्थिति मजबूत होने की संभावना है। ऐसे में वेंकैया का रोल काफी अहम होगा।