राष्ट्रपति उम्मीदवार के चयन के लिए तीन मंत्रियों की समिति बनाकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। सरकार की ओर से चर्चा के संकेत देकर एकओर उन्होंने विपक्ष के दावे को कमजोर करने का प्रयास किया है। तो प्रणव मुखर्जी के उत्तराधिकारी के रूप में राष्ट्रपति बनने का सपना पाल रहे मोदी सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की इच्छाओं पर भी विराम लगा दिया है।
राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में नायडू के नाम की चर्चा मीडिया में शुरू से थी। लेकिन सूत्र बताते हैं कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरूण जेटली के समर्थक भी अपने नेता को राष्ट्रपति पद पर विराजमान होते देखना चाहते थे। राष्ट्रपति उम्मीदवार चयन की समिति में आने के वजह से केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू के साथ वित्त मंत्री अरूण जेटली और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नाम पर चर्चा की संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं।
राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार तय करने के लिए बनी चयन समिति के सदस्यों से मंगलवार सुबह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मुलाकात का दौर शुरू किया। सबसे पहले अरुण जेटली से मुलाकात की और इसके बाद वेंकैया नायडु और राजनाथ सिंह से चर्चा की।
Delhi: BJP president Amit Shah reached Venkaiah Naidu's residence. #PresidentialElection pic.twitter.com/0rMcrjLLTs
— ANI (@ANI_news) 13 June 2017
#PresidentialElection: Amit Shah met Venkaiah Naidu. Earlier in morning he met committee member Arun Jaitley, likely to meet Rajnath Singh.
— ANI (@ANI_news) 13 June 2017
राजनैतिक दलों से चर्चा के लिए शाह ने बनाई समिति
अमित शाह
- फोटो : ANI
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जरिए राष्ट्रपति उम्मीदवार चयन करने के लिए बनी समिति का एलान करते हुए पार्टी महासचिव अरूण सिंह ने कहा है कि शाह ने भारत के राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं से चर्चा हेतु एक समिति का गठन किया है। इस समिति में राजनाथ सिंह के साथ अरूण जेटली और वेंकैया नायडू को शामिल किया गया है। यह समिति विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं से राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में चर्चा कर सर्वसम्मति बनाने का प्रयास करेगी।
शाह के दांव से विपक्ष हुआ चित्त
Amit Shah in Himachal
राष्ट्रपति उम्मीदवार पर सर्वसम्मति बनाने के नाम पर समिति का गठन कर शाह ने विपक्ष को चित्त कर दिया है। शाह के इस दांव से विपक्ष के वह आरोप ढेर हो गए हैं कि सरकार उनसे मामले में चर्चा नहीं कर रही है। विपक्ष एक माह पहले से ही बैठकें कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में जुटा था। सरकार के रवैये को ढाल बनाकर विपक्षी एकजूटता की राजनीति भी खूब चली जा रही थी।
मगर चुनाव प्रक्रिया की शुरूआत होने के बाद शाह ने समिति बनाकर ऐसा सियासी दांव चला है कि विपक्ष तो क्या भाजपा के अपने नेता भी चित्त हो गए हैं। अब विपक्ष सरकार पर इस बात का आरोप नहीं लगा सकती है कि सर्वसम्मति बनाने के लिए सत्ताधारी दल की ओर से प्रयास नहीं हुआ है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल अगले महीने 25 तारीख को खत्म हो रहा है। उनके उत्तराधिकारी का चुनाव 17 जूलाई को होना है और परिणाम 20 जूलाई को आएंगे। विपक्ष की ओर से उम्मीदवार चयन को लेकर 14 जून को बैठक होने की संभावना है। इससे पहले ही शाह ने समिति का दांव चल कर विपक्ष की रणनीति उलझा दी है।
उम्मीदवार चयन में दिख सकता है दलित—ब्राह्मण का समीकरण
amit shah
- फोटो : Getty
देश के अगले राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चयन के लिए उम्मीदवार चुनने में भाजपा राजनीतिक समीकरणों का पूरा ख्याल रखेगी। ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई मुश्किल पैदा न हो। सूत्र बताते हैं कि यूपी की कमान योगी आदित्य नाथ को सौंपने के बाद ब्राहण मतों के समीकरण को साधने का दबाव पार्टी पर है। जबकि दलितों को साधने की कवायद में भाजपा ही नहीं पूरा भगवा परिवार समरसता अभियान चलाए हुए है।
इसे ध्यान रखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि उपराष्ट्रपति का चुनाव बेशक दो माह बाद होना है लेकिन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति के साथ ही उपराष्ट्रपति के लिए भी चेहरा घोषित कर दिया जाएगा। उम्मीदवार चयन में पार्टी दलित और ब्राहण के गठजोड को साधने की कोशिश कर सकती है।