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केयर्न इंडिया मामला: टैक्स विवाद सुलझाने के लिए वेदांता ने सरकार के खिलाफ केस लिया वापस 

Mon, 13 Dec 2021 08:02 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली

सार

केयर्न इंडिया को 2011 में अग्रवाल के समूह द्वारा खरीदा गया था और बाद में फर्म का वेदांता लिमिटेड के साथ विलय कर दिया गया था।
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वेदांता प्लांट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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अरबपति अनिल अग्रवाल के खनन समूह वेदांता ने सोमवार को कहा कि उसने सरकार के साथ 20,495 करोड़ रुपये के कर विवाद को निपटाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के साथ-साथ एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में मामले वापस ले लिए हैं। 2016 के आंतरिक पुनर्गठन पर भारत के कारोबार को सूचीबद्ध करने से पहले किए गए कथित पूंजीगत लाभ के लिए ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी पर 10,247 करोड़ रुपये टैक्स लगाने के बाद आयकर विभाग ने कंपनी से टैक्स (जुर्माना सहित) में 20,495 करोड़ रुपये की मांग की थी।  

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केयर्न इंडिया को 2011 में अग्रवाल के समूह द्वारा खरीदा गया था और बाद में फर्म का वेदांता लिमिटेड के साथ विलय कर दिया गया था। एक बयान में वेदांता ने कहा कि उसने हाल ही में लागू किए गए कानून का उपयोग किया है जो विवाद को निपटाने के लिए 2012 के पूर्वव्यापी कर कानून का उपयोग करके लगाए गए सभी मांगों को खत्म कर देता है। उसी के लिए शर्तों के रूप में इसने सरकार के खिलाफ सभी कानूनी चुनौतियों को वापस ले लिया है और टैक्स मांग से संबंधित सभी भविष्य के अधिकारों को छोड़ने का वचन दिया है।

केयर्न एनर्जी सरकार के साथ अपने विवाद को समानांतर रूप से सुलझा रही है। यह पूर्वव्यापी टैक्स कानून का उपयोग करके एकत्र किए गए टैक्स की वापसी के 7,900 करोड़ रुपये प्राप्त करने के लिए मामलों को वापस ले रहा है। वेदांता ने दो मंचों  आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण और दिल्ली उच्च न्यायालय में करों की मांग को चुनौती दी थी, जबकि इसके मूल कंपनी वेदांत रिसोर्सेज ने सिंगापुर मध्यस्थता न्यायाधिकरण के समक्ष इस कदम को चुनौती दी थी।

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