ग्रामीण रोजगार और किसान हितों से जुड़े कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव फिर तेज हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने नए ग्रामीण रोजगार कानून के खिलाफ 16 जनवरी को देशभर में ‘ऑल इंडिया रेजिस्टेंस डे’ मनाने का ऐलान किया है। किसान संगठनों का आरोप है कि यह कानून मनरेगा की जगह लाकर गरीबों के हक पर चोट करता है।
नई दिल्ली में सोमवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसकेएम नेताओं ने मांग की कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी राम जी एक्ट को तुरंत रद्द किया जाए। किसानों ने कहा कि यह कानून संसद में विपक्ष के विरोध के बीच पारित किया गया और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ले रहा है, जिससे ग्रामीण गरीबों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
सरकार पर लगाए ये आरोप
एसकेएम ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इस कानून को अधिनायकवादी और जनविरोधी तरीके से पारित कराया। किसान नेताओं का कहना है कि यह कदम संसद में जबरन उठाया गया और इसका मकसद श्रमिकों व किसानों के अधिकारों को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि यह मनरेगा जैसे सामाजिक सुरक्षा कानून को खत्म करने की साजिश है।
अन्य कानूनों पर भी विरोध
किसान संगठनों ने सिर्फ वीबी जी राम जी कानून ही नहीं, बल्कि लेबर कोड्स, सीड्स बिल 2025, बिजली बिल 2025 को भी वापस लेने की मांग की। एसकेएम का आरोप है कि इंश्योरेंस बिल 2025 के जरिए बीमा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी गई है और शांति (SHANTI) बिल 2025 के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो देशी कॉरपोरेट हितों के पक्ष में है।
किसान-मजदूर एकता पर जोर
एसकेएम ने कहा कि ये सभी कदम अमेरिका के दबाव में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों और जनविरोधी नीतियों की कड़ी हैं, जिनसे मेहनतकश वर्ग सरकार से दूर होता जा रहा है। संगठन ने किसान-मजदूर एकता पर जोर देते हुए गांव-गांव महापंचायतें करने और नए साल में संघर्ष का संकल्प लेने की अपील की। एसकेएम ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार कानूनी गारंटी और किसानों के कर्जमाफी कानून की भी मांग दोहराई।
एसकेएम की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने 16 जनवरी 2026 को ‘ऑल इंडिया रेजिस्टेंस डे’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। संगठन की राष्ट्रीय परिषद की बैठक 11 जनवरी को दिल्ली में होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। गौरतलब है कि वीबी जी राम जी कानून को संसद ने देर रात पारित किया था और रविवार को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है। अब किसान संगठनों ने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है।
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