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तमिलनाडु: राज्यपाल आरएन रवि बोले- 'वसुधैव कुटुम्बकम' राजनीतिक नारा नहीं, भारत के डीएनए में चलने वाली अवधारणा

Mon, 20 Mar 2023 06:16 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोयंबटूर

सार

राज्यपाल आरएन रवि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में नहीं देखते हैं, बल्कि एक परिवार के रूप में देखते हैं। बीते नौ वर्षों में शुरु की गईं कल्याणकारी योजनाएं सभी के लिए हैं, न कि किसी विशेष धर्म और जाति के लिए।
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तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने सोमवार को कहा कि जी-20 की अध्यक्षता के लिए 'वसुधैव कुटुम्बकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) थीम उपयुक्त है, क्योंकि यह वर्षों से इस अवधारणा का पालन कर रहा है। वह श्रीकृष्ण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में 'जी-20 युवा राजदूत शिखर सम्मेलन 2023' को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। रवि ने कहा कि समूह की सालभर की अध्यक्षता की थीम 'एक धरती, एक परिवार और एक भविष्य' पर केंद्रित है।

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मोदी सरकार ने पूरे देश के लिए शुरु किए विकास कार्यक्रम
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में नहीं देखते हैं, बल्कि एक परिवार के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में आयुष्मान भारत स्वास्थ बीमा योजना सहित कल्याणकारी योजनाएं सभी के लिए हैं, न कि किसी विशेष धर्म और जाति के लिए। राज्यपाल ने कहा कि पिछले सत्तर वर्षों में ब्रिटिश राज की विरासत का अनुसरण करते हुए नीतियों और योजनाओं को आकार दिया गया। मोदी के सत्ता में आने के बाद से केंद्र ने पूरे देश के विकास के लिए कार्यक्रम शुरू किए हैं। 

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बीते नौ वर्षों में स्थापित हुए एक लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014 से पहले 500 स्टार्टअप स्थापित किए गए थे और यह संख्या बीते नौ वर्षों में बढ़कर एक लाख से ज्यादा पहुंच गई है। रवि ने कहा कि दुनिया को एख परिवार को रूप में देखने का भाजपा का नजरिया जी-20 की अध्यक्षता के लिए अमूल्य होगा और वसुधैव कुटुम्बकम कोई राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह भारत के डीएनए में चलने वाली अवधारणा है।
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पूरी दुनिया को परिवार मानकर किया भारत ने टीकों का निर्माण
उन्होंने कहा कि समृद्ध पश्चिमी देशों ने कोविड-19 के टीके विकसित किए और टीका राष्ट्रवाद  (वैक्सीन नेशनलिज्म) अपनाया, लेकिन भारत ने विभिन्न देशों की जरूरतों को महसूस किया और पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर टीकों का निर्माण किया। 

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