फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कला-संस्कृति और देशभक्ति का अद्भुत मेल है भुजोड़ी का ‘वंदे मातरम् मेमोरियल’

Sat, 02 Dec 2017 06:01 PM IST
अतुल सिन्हा, भुज से लौटकर/टीम डिजिटल अमर उजाला
विज्ञापन
Vande Mataram Memorial
विज्ञापन
दिल्ली के संसद भवन, इंडिया गेट, ग्यारह मूर्ति और आगरा के ऐतिहासिक किले को अगर आप एक साथ देखना चाहते हैं तो गुजरात के भुजोड़ी गांव आइए। कच्छ की अपनी तमाम खासियतें हैं, एक अलग सांस्कृतिक पहचान है और इसका अपना एक इतिहास भी है। 
विज्ञापन


लेकिन भुज के इस गांव भुजोड़ी में आपको देशभक्ति की ऐसी बेहतरीन और कलात्मक मिसाल मिलेगी कि आप चकित रह जाएंगे। यहां हाल ही बनाए गए वंदे मातरम् मेमोरियल में आपको ब्रिटिश राज से लेकर आज़ादी तक का बेहतरीन सफ़रनामा मिलेगा, वह भी कुछ इस अंदाज़ में मानो वो सारे पल सजीव हो उठे हों। और आप ये पूरा सफरनामा आधुनिक 4डी तकनीक के ज़रिये देख पाएंगे संसद भवन के भीतर बने 17 शानदार कमरों में।

पढ़ें- गुजरात: अमेठी में हार पर CM रूपाणी की राहुल पर चुटकी, बोले- कुशासन का देश दे रहा जवाब

करीब 12 एकड़ में बने वंदे मातरम् मेमोरियल में अकेले संसद भवन को एक लाख वर्ग फीट में बनाया गया है। इसमें करीब 60 करोड़ की लागत आई है और इसे बनने में चार साल लगे हैं। खनन के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी आशापुरा समूह ने वंदे मातरम् मेमोरियल बनाकर भुजोड़ी को दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक खास पहचान दी है।
विज्ञापन

Vande Mataram Memorial
इंडिया गेट से आप इस मेमोरियल में दाखिल होते हैं और खूबसूरत रास्ते से होते हुए आप सीधे संसद भवन पहुंचते हैं। इसकी बाईं ओर गांधी जी के डांडी मार्च वाली दिल्ली के ग्यारह मूर्ति की प्रतिमूर्ति आपको दिखेगी और दाईं ओर संसद भवन में बनी गांधी जी की विशाल प्रतिमा भी आपको दिख जाएगी।

 फिर आपको नज़र आएगा आगरा फोर्ट और इसके भीतर गांधी जी, सरदार पटेल से लेकर आज़ादी के तमाम सपूतों की जीवंत आकृतियां। मुख्य संग्रहालय संसद भवन की इमारत में है जहां आपको एक तरफ स्वराज आंदोलन के शांतिदूतों की झलक मिलेगी तो दूसरी तरफ क्रांति के नारे के साथ आज़ादी की जंग लड़ने वाले सपूतों की। 

17 कमरों में आपको सन 1600 से लेकर 1947 तक का इतिहास 17 एपिसोड में 4डी तकनीक के ज़रिये दिखेगा। संसद भवन के भीतर मुख्य हॉल के बीचोबीच बनाई गई है भारत माता की शानदार और विशाल प्रतिमा।
विज्ञापन

Vande
आशापुरा ग्रुप की वरिष्ठ प्रबंधक रागिनी व्यास बताती हैं कि इस संग्रहालय का मकसद यहां आने वाले लोगों में देश प्रेम की भावना जगाने के साथ साथ आजादी के महानायकों के प्रति सम्मान पैदा करना है। जिन लोगों ने दिल्ली का ऐतिहासिक संसद भवन और देश की शानदार धरोहरों को नहीं देखा है, उन्हें ठीक वैसी ही अनुभूति कराई जा सके।

वंदे मातरम् मेमोरियल के अलावा भुज का ये गांव पहले से ही यहां बने हीरालक्ष्मी क्राफ्ट पार्क की वजह से मशहूर है। इस क्राफ्ट पार्क में आपको कच्छ के अलावा गुजरात के तमाम इलाकों के लोक और आदिवासी कलाकार अपनी कला का प्रदशर्न करते नज़र आ जाएंगे। शाम के वक्त शानदार रोशनी में जगमगाते इस पार्क और मेमोरियल में आपको साउंड एंड लाइट का बेहतरीन नज़ारा भी देखने को मिलेगा।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें