फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांव की बेटी भी इस लायक हो कि घर का खर्च चला सकेः वंदना

Sat, 27 Oct 2018 08:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
Vandana Singh
विज्ञापन

अपनी जिद के बल पर आगे बढ़ रही वंदना आज दमदारी से कहती है कि बेटी इस लायक होनी चाहिए कि अपने दम पर खुद का और परिवार का खर्चा चला सके। श्रावस्ती के सेमगढ़ा गांव की वंदना के पारिवारिक हालात ऐसे थे कि उसका बाल विवाह तो हो ही जाता अगर उसने अडिग जिद न ठान ली होती। 

विज्ञापन


तीन बहनों में सबसे बड़ी वंदना के पिता तभी गुजर गए थे जब वंदना आठ साल की बच्ची थी। तीन बीघा जमीन के दम पर ही मां ने तीन बेटियों को पाला-पोसा। वंदना ने किसी तरह जूनियर हाइस्कूल की पढ़ाई पूरी की। उसके आगे पढ़ने के लिए उसने छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसके बावजूद मां उसकी शादी के लिए बात चलाने लगीं।

वंदना ने मां को हर तरह से समझाया कि उसकी न तो उम्र ही शादी लायक है और न ही वह अपनी पढ़ाई को एक मुकाम पर लाये बिना शादी करना चाहती है। लेकिन मां पर सामाजिक और आर्थिक, दोनों तरह के दबाव थे। वंदना ने न केवल मां को हौसला दिलाया बल्कि अपनी पढ़ाई के लिए खुद की लगन और काबिलियत के सहारे आगे बढ़ना जारी रखा। 
विज्ञापन




इस पिछड़े से गांव सेमगढ़ा की वंदना ने तमाम जद्दोजहद के बाद मां को इस बात के लिए राजी कर ही लिया वह अच्छी पढ़ाई करके कमायेगी और फिर शादी करेगी। अपने तय किए रास्ते पर आगे बढ़ती वंदना आज खुश है। समाज में भी इसका बेहतर संदेश जा रहा है। इंटरनेट साथी के रूप में काम कर रही वंदना ने ही अपनी यह वीडियो कथा बनाई है।
विज्ञापन


अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें