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टीकों का टोटा: स्पुतनिक की आपूर्ति से भी खास फर्क नहीं, जुलाई-अगस्त में ही टीकाकरण की रफ्तार बढ़ने के आसार

Sat, 01 May 2021 10:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शनिवार को केवल हुआ 27 लाख 44 हजार 485 का वैक्सीनेशन हुआ। सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक के पास 6.5 करोड़ से अधिक उत्पादन की क्षमता नहीं है। भारत को चाहिए 200 करोड़ खुराक
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शनिवार को रूस से स्पुतनिक-वी टीके की 1.5 लाख खुराक की पहली खेप पहुंची, लेकिन तैयार हालत में रूस से अभी तक एक दिन में खपने वाली खुराक (तीस लाख डोज) आने की संभावना कम है। ऐसे में भारत सरकार के पास टीकों का टोटा है। 

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नेशनल कोविड टास्क फोर्स, आईसीएमआर के अध्यक्ष डा. नरेन्द्र कुमार अरोड़ा का भी मानना है कि देश के पास लोगों को लगाने के लिए पर्याप्त संख्या में टीके नहीं हैं। डा. अरोड़ा ने अमर  उजाला को विशेष बातचीत में बताया कि मौजूदा समय में 18 साल अधिक उम्र वालों को पर्याप्त संख्या में टीका लगाने की स्थिति नहीं है। 

दोनों कंपनियां भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट महीने भर में मिलकर केवल 6-7 करोड़ (औसतन 6.5 करोड़) खुराक टीका का उत्पादन कर सकती हैं। डॉ. अरोड़ा का कहना है कि इस स्थिति में जून महीने के बाद जुलाई और अगस्त में ही सुधार आने की संभावना है। इसलिए अभी हर दिन 28-30 लाख से अधिक लोगों को ही टीका लगवाया जा सकता है।

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विदेश से भी कोई उम्मीद नहीं, मामला ऊंट के मुंह में जीरे जैसा
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि जॉनसन एंड जॉनसन, माडर्ना, फाइजर, स्पूतनिक वी, नोवा समेत सभी टीके कंपनियों से भारत को कोई बड़े पैमाने पर टीके मिलने की उम्मीद नहीं है। कोई यदि थोड़े-बहुत दे भी दे तो वह ऊंट के मुंह में जीरे जैसे होंगे। 

दिसंबर तक चाहिए 200 करोड़ खुराक
देश के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए भारत को दिसंबर 2021 तक 200 करोड़ खुराक चाहिए। अभी दुनिया के किसी देश या सभी कंपनियों को मिलाकर यह मांग पूरी हो पाने की संभावना नहीं है।  बताते हैं जुलाई-अगस्त तक भारत की दो कंपनियों की 10-15 करोड़ खुराक हर महीने उत्पादन करने की हो जाएगी और तभी देश में टीकाकरण अभियान में कोई खास तेजी आ पाने का अनुमान है।
 

18 साल से ऊपर वालों को क्यों दी गई अनुमति?

डॉ. अरोड़ा का कहना है कि टीका नहीं है, लेकिन 18 साल से ऊपर वालों को टीका लगाने, पंजीकरण करने की अनुमति देने का निर्णय राजनीतिक है। वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।  वह केवल इतना कह सकते हैं कि कोरोना को लेकर सरकार की प्राथमिकता में 45 साल से ऊपर वाले 40 करोड़ लोग हैं। इनके स्वास्थ्य को सबसे अधिक खतरा है। कोरोना संक्रमण से इन्ही लोगों की जान सबसे अधिक जाने की संभावना है। इसके लिए केन्द्र सरकार को 80 करोड़ खुराक से अधिक टीका चाहिए। 

24 घंटे में 27 लाख से ज्यादा को लगे टीके
शनिवार 1 मई को 15,69,846 लोगों ने पहली तो 11,74,639 ने दूसरी खुराक ली है। इस तरह से 27,44,448 लोगों को पिछले 24 घंटे में टीका लगा है। अभी तक देश में कुल 15 करोड़ 49 लाख 89,635 टीके की ही खुराक लगी है। इस तरह से इस वर्ग के लोगों के लिए अभी करीब 70 करोड़ खुराक चाहिए। 

डॉ. अरोड़ा का कहना है कि यदि 18 साल से अधिक उम्र वालों को जोड़ लें तो कुल करीब 200 करोड़ खुराक चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान रखने है कि टीका लगाए जाने के दौरान इसकी खुराक बर्बाद भी हो रही है। 

एक दिन में 30 लाख लोगों को ही टीका लगाने की क्षमता

कोविड टास्कफोर्स के अध्यक्ष ने कहा कि अभी तो देश के पास 70 हजार टीकाकरण केन्द्र में प्रतिदिन एक करोड़ लोगों को टीका की खुराक दी जा सकती है, लेकिन हम प्रतिदिन केवल 30 लाख लोगों को ही टीका लगा सकते हैं। क्योंकि हमारे पास खुराक नहीं है। 

यह पूछे जाने पर कि एक दिन में 1.5 करोड़ लोगों ने टीका लगवाने के लिए पंजीकरण कराया है तो डॉ. अरोड़ा का कहना है कि यह सूचना सुख देने वाली है। लेकिन हमारे पास इतनी खुराक नहीं है कि उन्हें लगा सकें। 

यह क्षमता जुलाई अगस्त के बाद ही बढ़ सकती है। इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक तेजी से काम कर रहे हैं। डॉ. अरोड़ा का कहना है कि टीका निर्माण कटिंग एज टेक्नोलॉजी से जुड़ी है। इसलिए टीका निर्माण और क्षमता बढ़ाने में समय लगेगा।

विदेशी टीका के सहारे कितना रहें?
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि जो विदेशी टीका देश में बनने लगेगा, उसके तैयार होकर लगने में तीन-चार महीने तक का समय लग जाएगा। इसलिए विदेश से 5 या 10 मिलियन खुराक मिल जाने से भी कुछ नहीं होने वाला है। वह साफ कहते हैं कि बहुत तेजी से काम होने पर भी विदेशी टीके के अगस्त से पहले उपलब्ध होने की संभावना कम है। तब तक यह नहीं बताया जा सकता कि कोरोना का संक्रमण भारत में कितना नुकसान पहुंचा चुका होगा।
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200 जिलों में लॉकडाउन ही प्रमुख उपाय

डॉ. अरोड़ा का कहना है कि कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए देश के 200 जिलों में तत्काल प्रभाव से लंबा लॉकडाउन ही प्रमुख उपाय है। ताकि हम लोगों को अधिकतम जान माल के नुकसान से पहुंचा सकें। लेकिन यह निर्णय भी केन्द्र सरकार या राज्य सरकारों को लेना है।
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