डॉ. अरोड़ा का कहना है कि टीका नहीं है, लेकिन 18 साल से ऊपर वालों को टीका लगाने, पंजीकरण करने की अनुमति देने का निर्णय राजनीतिक है। वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। वह केवल इतना कह सकते हैं कि कोरोना को लेकर सरकार की प्राथमिकता में 45 साल से ऊपर वाले 40 करोड़ लोग हैं। इनके स्वास्थ्य को सबसे अधिक खतरा है। कोरोना संक्रमण से इन्ही लोगों की जान सबसे अधिक जाने की संभावना है। इसके लिए केन्द्र सरकार को 80 करोड़ खुराक से अधिक टीका चाहिए।
24 घंटे में 27 लाख से ज्यादा को लगे टीके
शनिवार 1 मई को 15,69,846 लोगों ने पहली तो 11,74,639 ने दूसरी खुराक ली है। इस तरह से 27,44,448 लोगों को पिछले 24 घंटे में टीका लगा है। अभी तक देश में कुल 15 करोड़ 49 लाख 89,635 टीके की ही खुराक लगी है। इस तरह से इस वर्ग के लोगों के लिए अभी करीब 70 करोड़ खुराक चाहिए।
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि यदि 18 साल से अधिक उम्र वालों को जोड़ लें तो कुल करीब 200 करोड़ खुराक चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान रखने है कि टीका लगाए जाने के दौरान इसकी खुराक बर्बाद भी हो रही है।
कोविड टास्कफोर्स के अध्यक्ष ने कहा कि अभी तो देश के पास 70 हजार टीकाकरण केन्द्र में प्रतिदिन एक करोड़ लोगों को टीका की खुराक दी जा सकती है, लेकिन हम प्रतिदिन केवल 30 लाख लोगों को ही टीका लगा सकते हैं। क्योंकि हमारे पास खुराक नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि एक दिन में 1.5 करोड़ लोगों ने टीका लगवाने के लिए पंजीकरण कराया है तो डॉ. अरोड़ा का कहना है कि यह सूचना सुख देने वाली है। लेकिन हमारे पास इतनी खुराक नहीं है कि उन्हें लगा सकें।
यह क्षमता जुलाई अगस्त के बाद ही बढ़ सकती है। इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक तेजी से काम कर रहे हैं। डॉ. अरोड़ा का कहना है कि टीका निर्माण कटिंग एज टेक्नोलॉजी से जुड़ी है। इसलिए टीका निर्माण और क्षमता बढ़ाने में समय लगेगा।
विदेशी टीका के सहारे कितना रहें?
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि जो विदेशी टीका देश में बनने लगेगा, उसके तैयार होकर लगने में तीन-चार महीने तक का समय लग जाएगा। इसलिए विदेश से 5 या 10 मिलियन खुराक मिल जाने से भी कुछ नहीं होने वाला है। वह साफ कहते हैं कि बहुत तेजी से काम होने पर भी विदेशी टीके के अगस्त से पहले उपलब्ध होने की संभावना कम है। तब तक यह नहीं बताया जा सकता कि कोरोना का संक्रमण भारत में कितना नुकसान पहुंचा चुका होगा।
डॉ. अरोड़ा का कहना है कि कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए देश के 200 जिलों में तत्काल प्रभाव से लंबा लॉकडाउन ही प्रमुख उपाय है। ताकि हम लोगों को अधिकतम जान माल के नुकसान से पहुंचा सकें। लेकिन यह निर्णय भी केन्द्र सरकार या राज्य सरकारों को लेना है।