कार्यस्थलों पर टीकाकरण के लिए हर जिले में डिस्ट्रिक्ट टास्क फोर्स (डीटीएफ) बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। इसी तरह निगम अध्यक्ष की अगुवाई में शहरों में अर्बन टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इनकी देखरेख में जिलावार सरकारी और निजी दफ्तरों में टीकाकरण किया जाएगा। कंपनियां इसके लिए एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करेंगी, जो जिला स्वास्थ्य अधिकारी या निजी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर से संपर्क कर टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
दफ्तरों में ठीक से वैक्सीनेशन कराने की जिम्मेदारी नोडल ऑफिसर पर है। वैक्सीन के लिए पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनका रजिस्ट्रेशन करना और उसके बाद कोरोना वैक्सीन लगवाने जैसे कार्यों की देखरेख नोडल अधिकारी करेंगे। जिन दफ्तरों में टीकाकरण होना है, उनकी पहचान होने के बाद पूरी डिटेल कोविन ऐप पर रजिस्टर की जाएगी। यह काम सरकारी और निजी दफ्तरों को समान रूप से करना होगा।
दफ्तरों में वैक्सीन की इतनी कीमत होगी
सरकारी दफ्तरों में जिला स्वास्थ्य प्राधिकार की ओर से जो टीका लगेगा, वह निशुल्क होगा। जबकि निजी दफ्तरों में कोविड टीका लगाने के लिए शुल्क लिया जाएगा। निजी दफ्तरों में कोरोना वैक्सीन की डोज लगाने के लिए उतना ही शुल्क लिया जाएगा, जितना निजी अस्पतालों में लिया जाता है यानी कि सभी शुल्क जोड़कर 250 रुपये प्रति डोज कीमत ली जाएगी।
केंद्र सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि एक दफ्तर में केवल एक तरह का ही टीका दिया जाएगा ताकि पहली और दूसरी डोज में कोई अंतर न आए। इसलिए पहले ही तय हो जाएगा कि किस दफ्तर में कौन सा टीका दिया जाना है।अगर किसी कर्मचारी ने किसी सेंटर पर दूसरी कंपनी का टीका लगा लिया है, तो उसे उसकी अगली डोज के लिए उसी सेंटर पर जाना होगा। दफ्तर में एक ही कंपनी की दोनों डोज दी जाएगी।