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संसद में उत्तराखंड मामले पर चर्चा, सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर

Tue, 26 Apr 2016 03:32 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला,नई दिल्ली
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर भले ही संसद में सियासी संग्राम मचा हो, लेकिन इस पर चर्चा सुप्रीम कोर्ट के रुख पर ही निर्भर करेगी। अगर शीर्ष अदालत ने बुधवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन के फैसले को सही ठहराया तो इस मुद्दे पर संसद में चर्चा नहीं होगी। इसके विपरीत निर्णय आने की स्थिति में ही सरकार संसद में चर्चा के लिए राजी होगी।
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शीर्ष अदालत का निर्णय आने में अभी दो दिन बाकी हैं, लेकिन सरकार ने पक्ष में निर्णय न आने की स्थिति में कांग्रेस के खिलाफ हमलावर होने की रणनीति बनाई है। इस क्रम में सरकार कांग्रेस को राष्ट्रपति शासन के संदर्भ में उसका अतीत याद दिलाएगी और पार्टी के सत्ता में रहते अनुच्छेद 356 के 91 बार हुए इस्तेमाल की कैफियत पूछेगी। 

सरकार को शीर्ष अदालत से राहत मिलने पर संशय
नैनीताल हाईकोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बाद सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है, लेकिन सरकार में शामिल कानून के जानकारों को राहत मिलने पर संशय है। सरकार के एक मंत्री के मुताबिक, अगर शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति शासन को वैध ठहराया तो भाजपा को भावी रणनीति तय करने के लिए खासा वक्त मिलेगा।
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हालांकि इसके बाद मुख्य सवाल कांग्रेस के नौ बागी विधायकों के भविष्य पर अटक जाएगा। अदालत ने बागी सदस्यों की सदस्यता बहाल की तो भाजपा की राह बेहद आसान हो जाएगी।

ऐसा न कर बागी कांग्रेसियों की सदस्यता रद्द करने के फैसले को सही ठहराया तो सरकार को संसद से राष्ट्रपति शासन पर मंजूरी हासिल करने पर सहमति लेने से बचने के लिए सरकार गठन की राह प्रशस्त करनी होगी। इस बीच भले ही विपक्ष लगातार दबाव डाले, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा से बचती रहेगी।

कांग्रेस और अन्य दलों के संपर्क में नेता
इस बीच, भाजपा नेतृत्व ने राज्य इकाई के नेताओं को विपरीत सियासी परिस्थिति खड़ी होने की स्थिति से पहले ही आगाह कर दिया है। राज्य इकाई को कांग्रेस सहित गैर कांग्रेसी दलों के विधायकों से संपर्क साधने के लिए कहा गया है।

राज्य भाजपा के सभी बड़े नेताओं को इस मुहिम पर लगाया गया है। पार्टी नेतृत्व को इस मामले में सबसे बड़ी उम्मीद पूर्व सांसद सतपाल महाराज से है। सतपाल के कांग्रेस में रहते करीब आधा दर्जन विधायक उनके गुट के थे। नेतृत्व को उम्मीद है कि सतपाल 9 बागी विधायकों की तर्ज पर इन्हें साधने में सफल हो सकते हैं।
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