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महिलाओं की सुरक्षा पर खर्च होंगे 2919.55 करोड़ रुपये, चंडीगढ़ में बनेगी मॉडल फारेंसिक साइंस लैब 

Sun, 04 Mar 2018 10:01 AM IST
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पैनिक बटन
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उत्तर प्रदेश में बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा चाक-चौबंद होने जा रही है क्योंकि केंद्र सरकार इसी महीने (मार्च) बेसिक फोन के साथ पैनिक बटन योजना की शुरुआत करने जा रही है। पैनिक बटन इमरजेंसी रिस्पॉन्स स्पोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) से जुड़ा होगा। जैसे ही महिला या बेटी आपात स्थिति में पैनिक बटन दबाएगी, इसकी सूचना जीपीएस लोकेशन के चलते आसपास की पीसीआर समेत दोस्तों व परिवार के मोबाइल पर पहुंच जाएगी। यूपी के बाद सरकार इस योजना को देश के अन्य राज्यों से भी जोड़ेगी। वहीं, केंद्र सरकार निर्भया फंड से आठ राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा पर अलग-अलग योजना चलाएगी।

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केंद्र सरकार की एक मार्च को निर्भया फंड के तहत इंपावर्ड कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें यूपी में पैनिक बटन समेत आठ राज्यों में महिला सुरक्षा की विभिन्न योजनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में 2919.55 करोड़ रुपये की धनराशि निर्भया फंड में मंजूर हुई है। महिला व बाल विकास मंत्रालय और केंद्रीय गृहमंत्रालय के साथ प्रदेश सरकार भी इन योजनाओं में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। यूपी में पैनिक बटन को स्मार्ट के साथ बेसिक फोन से भी जोड़ा जाएगा। नए फोन में यह सुविधा उपलब्ध होगी, लेकिन पुराने फोन को भी इस पैनिक बटन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में वर्कशॉप आयोजित होंगी।

आम लोगों को इन वर्कशॉप में पैनिक बटन के बारे में बताया जाएगा। पैनिक बटन को सौ नंबर की बजाय 112 से जोड़ा जाएगा। यह नंबर एकल इमरजेंसी नंबर होगा, जिसका ट्रायल सफल रहा है। उधर, लखनऊ के लिए 195 करोड़ रुपये की योजना बनायी गयी है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सटीक जांच पड़ताल के लिए साइबर और फोरेंसिक सुविधा के लिए पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा शहर में महिलाओं से संबंधित मुद्दों से जुड़े लोगों को संवेदनशील बनाते हुए समग्र सुरक्षित शहर ईको सिस्टम का निर्माण होगा। 
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चंडीगढ़ में बनेगी हाइटेक लैब

चंडीगढ़ में मॉडल फारेसिंक साइंस लैब बनायी जाएगी, जिसमें हाइटेक मशीन, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अच्छे फारेसिंक एक्सपर्ट होंगे। इसके लिए 99.76 करोड़ रुपये वित्तीय खर्च के तहत दिए गए हैं। हाइटेक लैब में यौन उत्पीडन से जुड़े लंबित मामलों की फारेसिंक डीएनए जांच करवाने में मदद मिलेगी। फिलहाल चंडीगढ़, गुवहाटी, कोलकात्ता, हैदराबाद, पुणे, भोपाल समेत राज्यों में एक राज्य स्तरीय फारेसिंक लैब है। इन लैब में ही देशभर से यौन उत्पीडन और हत्या से जुड़े मामलों की फोरेंसिक जांच होती है। हालांकि लैब की संख्या कम होने के चले आधे से अधिक मामलों की रिपोर्ट सटीक नहीं आती, क्योंकि देरी के चलते सैंपल खराब हो जाते हैं।

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