किसी भी घर में नहीं शौचालय तो लोगों ने गांव का नाम रखा पीओके
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यूपी के एक गांव में मूलभूत सुविधाओं के न होने के चलते गांववालों ने गांव का नाम पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) रख दिया। खबर है कि गांववालों ने ऐसा प्रशासन और सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए किया है। इस गांव का असली नाम सिरम्मनपुर है और ये कानपुर से करीब 40 किमी की दूरी पर है। इस गांव की जनसंख्या 600 है जिसमें अधिकतर मझोले किसान है और मवेशी भी पाल रहे हैं।
गांव में नहीं हो पाती जवानों की शादी
शादी
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गाँव निवासी विजय मिश्रा ने बताया, गांव में हर दो तीन साल में बिजली विभाग खंभे तो लगा देते हैं लेकिन अभी तक बिजली के तार नहीं लगाए है और गांव के किसी भी घर में शोचालय नहीं है साथ ही पूरे गांव को पानी के लिए सिर्फ दो ही हैंड पंप का सहारा है।
लेकिन इस गांव की एक बड़ी समस्या ये भी है कि यहां जवान शादी के इंतजार में बूढ़े होते जा रहे हैं क्योंकि गांव की हालत देखकर कोई भी अपनी बेटी की शादी करके इस गांव में नहीं भेजना चाहता है। 55 साल के प्रेमचंद की शादी नहीं हुई है। वे मज़ाक में कहते हैं, "अब मैं रिटायर हो चुका हूँ। जब गांव की ही हालत इतनी खराब है तो कौन चाहेगा की उसकी लड़की यहाँ आकर रहे।"
गांव में नहीं पानी की सुविधा
पानी
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वहीं, सिरम्मनपुर गांव के लोग इस बात बेहद भड़के हुए हैं कि गांव के बगल के दो गांव-दौलतपुर और ईंटारोड़ा में तो विकास हो गया है लेकिन उनके गांव में नहीं। यही कारण है कि उन्होंने इस गांव का नाम पीओके रख दिया है।
उनको उम्मीद थी कि नयी सरकार शायद गांव में कुछ विकास के काम शुरू करेगी। लेकिन जब ठोस कदम नहीं उठाये गए तो उन्होंने गांव में तमाम जगह बैनर लगा दिए जिस पर पीओके लिखा हुआ है।
गांव में है करीब दो हजार मवेशी
मवेशी
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वहीं, पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने आगे बताया कि मोदी सरकार शौचालय को लेकर इतना शोर मचाती है लेकिन हमारे गांव में एक भी शौचालय नहीं है। गांव की एक महिला सरोज देवी ने कहा, "चाहे बुज़ुर्ग हों या फ़िर विकलांग या लड़कियां या औरतें, सभी को शौच के लिए दूर जाना पड़ता है। " गांव के किनारे एक बहुत बड़ा तालाब था, जो सूख चुका है। गांव वाले अब उस सूखे तालाब में गाय और भैंस बांधते हैं। इस गांव में करीब 2000 मवेशी है जिन्हें पानी पिलाने के लिए गांव से पाच किमी दूर ऋंद नदी ले जाना पड़ता है।
इतना ही नहीं सिरम्मनपुर के आसपास कई किलोमीटर तक न तो कोई स्कूल है और न ही कोई सरकारी अस्पताल और इन्ही मूलभूत कमियों के चलते सिरम्मनपुर का हर व्यक्ति विजय मिश्रा का साथ दे रहा है। उनको कोई डर नहीं है कि गांव का नाम पीओके रखने के कारण प्रशासन उन्हें देशद्रोही करार देकर उन्हें जेल भेज सकता है।
वो कहते हैं, "अपने गांव के विकास के लिए मैं जेल भी जाने के लिए तैयार हूँ।"
प्रशासन ने नहीं ली कोई खबर
प्रशासन
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वहीं, जब इस बात की खबर प्रशासन को लगी तो लेखपाल गांव का हाल जानने पहुचें और लोगों की समस्याओं को जानने की भी कोशिश की। ऐसे में गांव के प्रधान अनिल पाल का कहना है कि "ये बात ग़लत है कि सिरम्मनपुर गांव अन्य गांवों के मुक़ाबले पिछड़ा है। बाकी सब गांव भी उतने ही पिछड़े हैं और वहां भी विकास की ज़रूरत है।" बता दें कि पाल दौलतपुर, ईंटारोड़ा और सिरम्मनपुर तीन गांवों के प्रधान है।
पाल ने कहा कि हर गांव में कई समस्याएं हैं जहां तक बात पानी की है तो हैंड पंपों को ठीक करवाया जाएगा। वहीं, पाल ये भी कहते हैं कि "स्वच्छ भारत मिशन या हर घर में शौचालय तो नया अभियान है और इसके मुताबिक वे हर घर में शौचालय उपलब्ध करवा देंगे। लेकिन गांववालों ने कहा है कि प्रधान को वोट ना देने का बदला वे गांव के लोगों को परेशान करके निकाल रहे हैं।