केवी सुब्रमण्यन ने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य को बहुआयामी सुझाव दिए गए हैं। यूपी को निजी निवेश को बढ़ावा देना होगा। श्रम सुधारों को लागू करना होगा। राज्य उन पर अमल कर सका, तो नौकरियों की बहार होगी और रोजगार के 5.7 करोड़ से ज्यादा अवसर पैदा होंगे।
यूपी को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का रोडमैप देने वाले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नामित कार्यकारी निदेशक केवी सुब्रमण्यन का कहना है कि प्रदेश को पांच वर्ष में मौजूदा अर्थव्यवस्था के आकार से चार गुना ज्यादा वृद्धि करनी होगी। वर्ष 2027 तक 30-35 फीसदी विकास दर हासिल करनी होगी। 76 लाख करोड़ रुपये निवेश करना होगा। इसके लिए एफडीआई से देसी निवेशकों तक कहां से कितना निवेश आ सकता है, इसका खाका उपलब्ध कराया है।
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प्रो. सुब्रमण्यन ने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य को बहुआयामी सुझाव दिए गए हैं। यूपी को निजी निवेश को बढ़ावा देना होगा। श्रम सुधारों को लागू करना होगा। राज्य उन पर अमल कर सका, तो नौकरियों की बहार होगी और रोजगार के 5.7 करोड़ से ज्यादा अवसर पैदा होंगे।
5.7 करोड़ नौकरियां पैदा करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को बनाना होगा विकास का इंजन
यूपी को 2027 तक चाहिए...
45 फीसदी निवेश विनिर्माण क्षेत्र में यानी करीब 43 लाख करोड़
19 लाख करोड़ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रदेश को चाहिए
30-35 प्रतिशत औसत वृद्धि दर
43-47 प्रतिशत जीएसडीपी का निवेश
इस तरह तैयार हुआ रोडमैप
प्रो. सुब्रमण्यन बताते हैं, यूपी की आर्थिकी अभी करीब 250 अरब डॉलर की है। इसे चार गुना करना है। इसके लिए डॉलर के मुकाबले रुपये के 30 वर्ष के औसत मूल्य ह्रास का अध्ययन किया।
एक सदी में जिन देशों की वृद्धि दर न्यूनतम 10 साल तक पांच फीसदी की दर से बढ़ी है, उनका विश्लेषण किया। पता चला कि उनके विकास का मुख्य आधार निजी निवेश था। निजी निवेश से ही वर्चुअस साइकिल (सुदृढ़ चक्र) चलती है। वे बताते हैं, आर्थिकी की वर्चुअस साइकिल शब्द का उल्लेख 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण में किया था।
इस अनुमान के आधार पर सालाना 30 फीसदी से अधिक वृद्धि दर की जरूरत होगी, निजी निवेश को सर्वाधिक प्रोत्साहन देना होगा। जीएसडीपी में इस क्षेत्र का औसत योगदान सर्वाधिक होगा।
डिमांड बढ़ाने पर फोकस
हमने ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जिसमें चीन की निर्यात क्षमता कम हो रही है, लेकिन यूपी के लिए संभावना बन रही है।
कृषि में काफी संभावनाएं हैं। रणनीति निर्धारण में उन पर ध्यान दिया गया है। लेकिन, रोजगार बढ़ाना है, डिमांड बढ़ाना है तो पूरा फोकस विनिर्माण क्षेत्र पर करना होगा।