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उत्तर प्रदेश को नहीं पता, राज्य में हैं कितने गैर-पंजीकृत बाल सुधार गृह, नहीं दे रहा जवाब

Tue, 07 Aug 2018 10:24 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
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बच्चों को दुलार करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरपुर के बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया और हरदोई जिलों के बाल सुधार गृहों में लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाए जाने का मामला सामने आने के बाद एक और नया खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश के पास सूची ही नहीं है कि राज्य में कितने बाल सुधार गृह पंजीकृत हैं और कितने बाल सुधार गृह गैर-पंजीकृत हैं। 
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने खुलासा किया है कि उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है, जिसके पास गैर-पंजीकृत सुधार गृहों की सूची नहीं है। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य में चल रहे अवैध बाल सुधार गृहों की सूची देने के लिए पांच बार मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया।

पत्र में पूछा गया कि जिलेवार बाल सुधार गृहों की सूची के साथ उनमें रह रहे बच्चों की संख्या उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, पूछा गया कि राज्य में कितने बाल सुधार गृह गैर पंजीकृत हैं। आयोग ने 22 जनवरी, 2018 तक सभी बाल सुधार संस्थानों के नाम-पते के साथ सूची भेजने को कहा। लेकिन राज्य सरकार ने केवल पंजीकृत बाल सुधार गृहों की सूची ही उपलब्ध कराई। 
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आयोग के सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार से मिले जवाब के मुताबिक 231 बाल सुधार गृह ही पंजीकृत हैं। हालांकि राज्य सरकार ने इसका खुलासा नहीं किया कि इन बाल सुधार गृहों में कितने बच्चे रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले केरल जैसे छोटे राज्य में 1,165 गैर पंजीकृत बाल सुधार गृह हैं जहां तकरीबन 25 हजार बच्चे हैं, तो उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कितने होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आयोग को मिले आंकड़ों के मुताबिक देशभर में 5 हजार 850 बाल सुधार गृह पंजीकृत हैं और 1 हजार 339 गैर पंजीकृत हैं। इन बाल सुधार गृहों में 2 लाख 32 हजार 937 बच्चे रह रहे हैं। 

सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में बाल सुधार गृहों में बच्चों के साथ हो रहे शोषण से जुड़ी एक याचिका पर दिए फैसले में सभी राज्य सरकारों को तुरंत बाल गृहों का दौरा करने को कहा था। जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को पत्र लिख कर 31 दिसंबर, 2017 तक सभी बाल सुधार गृहों को पंजीकृत कराने और डाटाबेस बनाने को कहा। 

वहीं जूवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 के मुताबिक राज्य सरकार और स्वयं सेवी संगठनों या एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे बाल संस्थानों की सूची उपलब्ध कराना आवश्यक है। एक्ट के मुताबिक संस्थान प्रारंभ करने की तिथि से लेकर छह माह तक रजिस्टर्ड कराना आवश्यक है। एक्ट में स्पष्ट निर्देश है कि केन्द्र या राज्य सरकार से अनुदान लेने वाले बाल सुधार गृहों का भी पंजीकरण आवश्यक है।
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